IPC 206 - न्यायालय से अपनी संपत्ति की जानकारी छुपाना, कितना गंभीर अपराध कितनी सजा, पढ़िए

Legal general knowledge and law study notes

जब कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के मामले में न्यायालय की कार्यवाही के दौरान अथवा न्यायालय के आदेश के बाद अपनी संपत्ति की जानकारी को कपटपूर्वक छुपाता है, अथवा संपत्ति को छुपाता है, अथवा संपत्ति का सौदा अथवा विक्रय इत्यादि कर देता है। तब ऐसे व्यक्ति को दंडित किए जाने के लिए भारतीय दंड संहिता 1860 में विशेष धारा का प्रावधान किया गया है। 

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 206 की परिभाषा

जो कोई व्यक्ति सिविल मामले मे न्यायालय के आदेश आने से पहले या न्यायालय की डिक्री, आदेश के बाद अपनी संपत्ति को कपटपूर्वक छिपाता है, उस स्थान से हटाता है, या कहीं संपत्ति को ठिकाने लगाता है तब वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 206 के अंतर्गत अपराधी घोषित किया जाएगा एवं सक्षम न्यायालय द्वारा दंडित किया जाएगा।

Indian Penal Code, 1860 section 206 Punishment

इस धारा के अपराध असंज्ञेय एवं जमानतीय होते हैं। इनकी सुनवाई किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है। इस धारा के अपराध के लिए अधिकतम दो वर्ष की कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 

इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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