IPC 188 - सरकारी अफसर के आदेश की अवमानना, पढ़िए कितनी सजा होती है

General knowledge and law study notes

कोई सरकारी अफसर जब अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए किसी आदेश को जारी करता है तो उसकी अवमानना करना दंडनीय अपराध होता है। उदाहरण के तौर पर शांति बनाए रखने के लिए धारा 144 लगाई जाती है लेकिन और लंदन करने पर धारा 188 के तहत मामला दर्ज किया जाता है। 

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 188 की परिभाषा 

किसी लोक सेवक द्वारा जब विधिपूर्ण तरीके से कोई आदेश निकाला जाता है और कोई व्यक्ति उसका पालन नहीं करता है जिसके कारण किसी व्यक्ति को या लोक सेवक को  कोई बाधा उत्पन्न हो, क्षोभ हो, लोक शांति या परिशांति भंग हो, परेशानी हो या किसी भी प्रकार की क्षति हो या होने की संभावना हो तब आदेश की अवेहलना करने वाला व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के अंतर्गत दोषी होगा। इसे वैध प्राधिकारी की अवमानना का अपराध कहा जाता है।

Indian Penal Code, 1860 section 188 punishment

यह अपराध संज्ञेय एवं ज़मानतीय होते है। इनकी सुनवाई किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है सजा- इस अपराध के लिए अधिकतम एक माह की कारावास या जुर्माना या दिनों से दण्डित किया जा सकता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144, बलवा, दंगा आदि के आदेश की अवेहलना करता है तब उसे छ:माह की कारावास या जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकता है।  Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 

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