BHOPAL NEWS- असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के लिए चारों यूनिवर्सिटी के कुलपति ने राज्यपाल के निर्देश नहीं माने

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय एवं अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने असिस्टेंट ऑफिसर भर्ती के लिए 3 महीने पहले राज्यपाल द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया। 

किस यूनिवर्सिटी में कितने पद खाली, राज्यपाल ने क्या निर्देश दिए थे

  • RGPV- राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 413 पद में से 329 खाली है। 
  • BU BHOPAL- बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय में 105 में से 68 पद खाली हैं। 
  • MP BHOJ- मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय में 54 में से 43 पद खाली हैं। 
  • ABVHVV- अटल बिहारी वाजपेई हिंदी विश्वविद्यालय में 27 में से 14 पद खाली हैं। 
मध्य प्रदेश के राज्यपाल महोदय श्री मंगू भाई पटेल ने मार्च 2023 में कुलपतियों को निर्देशित किया था कि वह आने वाले 3 महीने के भीतर सहायक प्राध्यापक के रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी करें। 

कुलपतियों ने राज्यपाल की बात क्यों नहीं मानी

मध्यप्रदेश में विश्वविद्यालयों के कुलपति मनमाने अधिकार चाहते हैं। भर्ती प्रक्रिया में भारी पॉलिटिकल पर आता है। एक छोटी सी भी गड़बड़ी हो जाए तो कुलपति को हटा दिया जाता है। इसलिए कुलपति चाहते हैं की भर्ती की प्रक्रिया मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग इंदौर के माध्यम से हो परंतु बाकी सभी अधिकार उनके पास रहें जबकि मध्य प्रदेश पीएससी के अपने भर्ती नियम है और एमपी लोक सेवा आयोग का कहना है कि वह अपने निर्धारित नियमानुसार ही भर्ती करेंगे। 

MPPSC के भर्ती नियम क्या है

एमपी पीएससी द्वारा केवल उन्हीं पदों पर भर्ती की जाती है जिनके विभागीय भर्ती के नियम राज्यपाल के माध्यम से जारी किए जाते हैं।
भर्ती नियम व तरीके में यह स्पष्ट उल्लेख होना आवश्यक है कि आयोग द्वारा सीधी भर्ती के माध्यम से पदों की पूर्ति की जाना है।
आयोग द्वारा भरे गए पदों की विभागीय पदोन्नति आयोग के अध्यक्ष या उनके मनोनीत सदस्य द्वारा की जाती है।
आयोग द्वारा भरे गए अधिकारी के विरुद्ध . कदाचार के मामले में विभागीय जांच रिपोर्ट आयोग को भेजनी होती है। इस पर आयोग अभिमत जरूरी है।
चार पाइंट में तैयार किए गए भर्ती नियम का अनुमोदन आयोग द्वारा कराया जाना आवश्यक होता है। 

अब क्या होगा

फिलहाल कुछ भी होने की संभावना नहीं है क्योंकि यह विवाद पिछले 8 सालों से चल रहा है। कुलपति चाहते हैं कि एमपीपीएससी केवल चयन परीक्षा आयोजित करके समस्त असिस्टेंट प्रोफेसर को उनके हवाले कर दे। जबकि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के संविधान के अनुसार, उनके द्वारा नियुक्त किए गए लोक सेवकों की सुरक्षा भी आयोग द्वारा की जाती है। बिलकुल वैसे ही जैसे यूपीएससी द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा, अथवा अन्य भारतीय सेवाओं के लिए नियुक्त किए गए अधिकारियों की की जाती है। 

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