मध्यप्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में जस्टिस जी एस अहलूवालिया की सिंगल बेंच ने एक पिटीशन में फाइनल डिसीजन देते हुए कहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा का शिक्षक चयन परीक्षा से कोई संबंध नहीं है। यहां तक कि शिक्षक पात्रता परीक्षा, भर्ती प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। इसलिए एलिजिबिलिटी का क्राइटेरिया दोनों में अलग-अलग हो सकता है।
मध्य प्रदेश शिक्षक भर्ती- पात्रता और चयन परीक्षा, एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया, हाई कोर्ट डिसीजन
याचिकाकर्ता श्री गणेश प्रसाद प्रजापति सहित अन्य 18 उम्मीदवारों की ओर से शिक्षक चयन परीक्षा में निर्धारित किए गए न्यूनतम प्राप्तांक को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। कहा गया था कि मध्य प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा में न्यूनतम प्राप्तांक 50-60% (आरक्षित श्रेणी एवं सामान्य श्रेणी के लिए) निर्धारित किए गए थे जबकि चयन परीक्षा में 40-50% न्यूनतम प्राप्तांक घोषित किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया था कि खेल के बीच में खेल के नियम नहीं बदल सकते। इसलिए चयन परीक्षा में न्यूनतम प्राप्तांक असंवैधानिक है और इन्हें पात्रता परीक्षा के समान 50-60% सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
Madhya Pradesh Teacher Recruitment- Eligibility and Selection Test, Eligibility Criteria, High Court Decision
इस याचिका का विरोध करते हुए सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि पात्रता परीक्षा का आयोजन उम्मीदवारों को केवल शॉर्टलिस्ट करने के लिए किया गया है। इसका चयन परीक्षा से कोई संबंध नहीं है। चयन परीक्षा के नियम प्रथक से निर्धारित किए गए हैं। शासन के तर्कों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने याचिका को निरस्त कर दिया।
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