MP NEWS- 62% वाला ओबीसी अनारक्षित तो 65% वाला ओबीसी आरक्षित कैसे, हाईकोर्ट ने पूछा

Bhopal Samachar
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जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन के गृह सचिव, डीजीपी और व्यापम को नोटिस जारी करके पूछ आएगी किस प्रावधान के तहत 62% वाले ओबीसी कैंडिडेट को अनारक्षित घोषित किया गया जबकि 65% वाले ओबीसी कैंडिडेट को आरक्षण का लाभ दिया गया। मामला मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती का है जिसमें पुलिस विभाग की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।

मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती- आरक्षण के निर्धारण में गड़बड़ी

मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग मंत्रालय द्वारा सन 2016 में कुल 12006 रिक्त पदों पर भर्ती के लिए जॉब नोटिफिकेशन जारी किया गया था। इसमें OBC- अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1123 पद आरक्षित किए गए थे। जब भर्ती प्रक्रिया संपन्न हुई तब अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित पदों में से मात्र 89 पद ही भरे रहे तथा 889 पद रिक्त रखे गए। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश पुलिस को निर्देशित किया था कि वह याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का 60 दिन के भीतर निराकरण करें, परंतु मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा अभ्यावेदन का निराकरण नहीं किया गया बल्कि दिसंबर 2022 में अभ्यावेदन के तथ्यों को असत्य बताया गया। इसके चलते फिर से हाईकोर्ट में याचिका प्रस्तुत की गई।

62% वाले ओबीसी को अनारक्षित कर दिया, 65% वाले को आरक्षण का लाभ दिया

सैकड़ों ओबीसी कैंडिडेट द्वारा मेरिट में उच्च अंक अर्जित किए गए इसलिए उन्हें अनारक्षित श्रेणी में चयन करके SAF में नियुक्ति दे दी गई। जबकि उक्त अभ्यर्थियों को उनकी ही ओबीसी कैटेगरी में जिला पुलिस बल, स्पेशल ब्रांच और क्राइम ब्रांच आदि में वरीयता के आधार पर पदस्थापना दी जानी चाहिए थी। पुलिस विभाग द्वारा 62% अंक अर्जित करने वाले ओबीसी कैंडिडेट को अनारक्षित कर दिया गया जबकि 65% अंक अर्जित करने वाले ओबीसी कैंडिडेट को आरक्षित ओबीसी कैटेगरी में चयन करके जिला बल आवंटित किया गया। 

पुलिस विभाग तथा व्यापम के उक्त भेदभाव पूर्ण कृत्य को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका क्रमांक WP /3966/2023 के माध्यम से चुनौती दी गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ने न्यायालय में उनका पक्ष रखा। श्री रामेश्वर सिंह के तर्कों से सहमत होते हुए हाईकोर्ट ने मध्यप्रदेश शासन गृह विभाग मंत्रालय के सचिव, डीजीपी मध्य प्रदेश, एडीजीपी (चयन) एवं व्यापम को नोटिस जारी करके 4 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं के आरोपों पर जवाब, तलब किया है। सुनवाई की अगली तारीख है 17 अप्रैल 2023 निर्धारित की गई है। 

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