इस बीमारी में ऐसा क्या है जो डॉक्टर की बेटी को सुसाइड करना पड़ा - OCD full form symptoms treatment in Hindi

इंदौर
। प्रख्यात महिला डॉक्टर अनीता चौकसे की बेटी प्रथमा चौकसे ने दसवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली(पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)। वह ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर नाम की बीमारी से पीड़ित थी और इसी के कारण सुसाइड किया। आइए जानते हैं कि इस बीमारी में ऐसा क्या है जिससे एक डॉक्टर मां अपनी बेटी को नहीं बचा पाई। 

OCD- ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर के लक्षण

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर ( Obsessive Compulsive Disorder) एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से रोगी के दिमाग में तर्कहीन और आधारहीन विचार आते हैं। सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह होती है कि रोगी जानता है कि वो जो सोच रहा है वो आधारहीन है लेकिन दिमाग में मच रहा कौतूहल उस तर्कहीन और आधारहीन विचार के अनुरूप काम करने के लिए उसे मजबूर करता है। यह एक विषम परिस्थिति है जब आधा दिमाग समझदार होता है और आधा दिमाग जैसे किसी और के कंट्रोल में चला जाता है।

obsessive compulsive disorder symptoms

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (Obsessive Compulsive Disorder) से ग्रसित व्यक्ति एक ही काम को बार-बार करता है। उदाहरण के तौर पर जैसे वो घर में ताला लगाने के बाद उसे बार-बार चेक करता है कि कहीं ताला खुला तो नहीं रह गया। कुछ लोग सफाई इस हद तक बार-बार करने में जुट जाते हैं कि उन्हें ठंड और गर्मी में फर्क महसूस नहीं होता है। बरामदे को बार-बार ठंड की रात में धो डालना, बच्चो के कपड़े को बार-बार धो देना ताकी उसे कोई बैक्टीरियल डीजीज न हो। इतना ही नहीं पैसों के लेन देन में बार-बार पैसे गिनना कि पैसे पूरे हैं या नहीं। इस तरह के कई उदाहरण ये साबित करते हैं इंसान ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (Obsessive Compulsive Disorder) से ग्रसित है।

What are the two main symptoms of OCD

सीधे अर्थ में समझा जाए तो किसी भी चीज के प्रति ऑब्सेशन उस इंसान को उसे पूरा करने के लिए मजबूर करने लगे और ये बीमारी इंसान के व्यवहार में लगातार परिलक्षित होने लगे तो इसे ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर ( Obsessive Compulsive Disorder) कहा जाता है। इंसान ये जानते हुए भी कि जो वो सोच रहा है वो सही नहीं है लेकिन उसे पूरा करता है क्योंकि उसे क्षणिक शांती मिलती है। क्षणिक शांती के आगे मजबूर होकर धीरे-धीरे वो इसका आदी हो जाता है और ऐसा नहीं करने पर वो व्याकुल और बेचैन नजर आता है।

जुनूनी बाध्यकारी विकार (OCD) से पीड़ित मरीज क्या पागल होते हैं

OCD बीमारी से ग्रसित इंसान का व्यवहार भले ही अटपटा (Abnormal) लगे लेकिन उनका बौद्धिक स्तर उम्दा होता है। वो किसी भी काम को Perfection के लेवल पर ले जाना चाहते हैं इसलिए उसे बार-बार करने की उनकी कोशिश एक बीमारी की शक्ल अख्तियार कर लेती है।

ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर बीमारी की वजह 
Causes Obsessive Compulsive Disorder

इस बीमारी से ग्रसित लोगों में पाया गया है कि मस्तिष्क के बाहरी भाग और भीतरी भाग के बीच तालमेल का अभाव होता है। ऐसा पाया गया है कि न्यूरोट्रांसमीटर सिरोटोनिन के असंतुलित फॉरमेशन के कारण OCD (Obsessive Compulsive Disorder) जैसी बीमारी लोगों में पाई जाती है। इस बीमारी की वजहें अनुवांशिक (Genetic) भी हो सकती हैं साथ ही मस्तिष्क में खराबी और स्ट्रेस (Stress)  मतलब जीवन में असंतुलन भी वो वजहें हैं जिनकी वजह से ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर ( Obsessive Compulsive Disorder) की बीमारी से लोग पीड़ित हो सकते हैं। फिलहाल इस पर शोध जारी है और इसको लेकर कई और जानकारियां जुटाने के लिए मेडिकल साइंस लगातार प्रयासरत है।

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साइकोलोजिस्ट डॉ संजीव त्यागी कहते हैं कि OCD से पीड़ित लोगों को सुनने और समझने की जरूरत होती है। उन्हें समझाना और दवाब डालकर कोई चीज छोड़ने के लिए मजबूर करना Counter Productive हो सकता है। कई मरीजों को ऐसा लगता है कि उनके अंदर की भावनाओं को समझने वाला कोई नहीं है। 

इसलिए डॉ संजीव त्यागी के मुताबिक मरीजों को उसके अंदर की प्रबल भावनाओं को प्रकट करने का अवसर मिलना चाहिए और वो तभी कर पाते हैं जब उन्हें ऐसा विश्वास हो पाता है कि वो जो भावनाएं व्यक्त करेंगे उसका मज़ाक नहीं उड़ाया जाएगा।

साइकेट्रिस्ट डॉ आर चंद्रा कहते हैं कि ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (Obsessive Compulsive Disorder) से पीड़ित मरीज की बीमारी diagnose करना तो आसान होता है लेकिन उसका ट्रीटमेंट हमेशा मुश्किल होता है।

डॉ चंद्रा के मुताबिक हर रोगी का RESPONSE दवा के लिए अलग होता है इसलिए कई बार परिवार या दोस्तों के द्वारा रोगी को समझाया जाना रोगी को और चिड़चिड़ा बना देता है। इसलिए अलग अलग रोगी का इलाज उसी बीमारी के लिए अलग दवाई का COMBINATION देकर किया जाता है।

कुछ रोगी छोटे डोज में भी बेहतर response करते हैं वहीं कुछ को हायर डोज की जरूरत पड़ती है। सामान्यत रोगी का इलाज Anti-depressant और Psychotherapy देकर किया जाता है जबकि Psychotherapy कम ही मामलों में असरदार साबित होता है।

जानकार मानते हैं कि अभी भी दिमाग मेडिकल साइंस के लिए बेहद complex विषय है और इसको ठीक से समझ पाने में मेडिकल साइंड अभी भी पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाया है। एंटी डिप्रेसेंट सिरोटोनिन की मात्रा तो दिमाग में बढ़ाता है लेकिन दिमाग के कई हिस्से में इसकी मात्रा कितनी हो इसको लेकर अभी भी clarity नहीं बन पाई है।

परंतु डॉक्टर्स इस बात को लेकर एकमत हैं कि मानसिक समस्या भी बाकी अन्य शारीरिक समस्याओं की तरह हैं इसलिए इसको लेकर कोई भी गड़बड़ी नजर आए तो फौरन चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए। परेशानी का शुरूआती दौर में ही समाधान निकालना बेहद सरल होता है, वहीं दिमाग जैसे कंप्लेक्स चीजों का इलाज गंभीर बीमारी से ग्रसित हो जाने के बाद उतना ही मुश्किल होता है।