मध्यप्रदेश में J-BJP और BJP के बीच खुली जंग, दोनों पक्षों में चुनाव की तैयारी- MP NEWS

भोपाल
। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2023 नजदीक आ गए हैं और इसी के साथ J-BJP (ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति निष्ठा रखने वाले कार्यकर्ता) और BJP (भारतीय जनता पार्टी के प्रति निष्ठा रखने वाले कार्यकर्ता) के बीच खुली जंग शुरू हो गई है। दोनों ही पक्ष चुनाव की तैयारी कर रहे हैं और इस बार J फैक्टर के कारण मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरकार को भितरघात का सामना करना पड़ सकता है। 

सागर में धनौरा तो सिर्फ एक चेहरा है, राजपूत की राह में कांटे बहुत हैं

सागर जिले की सुरखी विधानसभा सीट पर गोविंद सिंह राजपूत ने राजकुमार सिंह ठाकुर 'धनौरा' को आते ही धूल चटा दी थी। उन्हें पार्टी से निष्कासित करवा दिया गया। बदले में धनौरा ने भी मोर्चा खोल दिया है। ना केवल प्रॉपर्टी के मामलों का खुलासा किया है बल्कि पदयात्रा के माध्यम से भाजपा की विचारधारा वाले लोगों को लामबंद कर रहे हैं। इसके अलावा सागर जिले में डॉक्टर गोविंद सिंह राजपूत ने और भी कई तरह के इंटरफेयर किए हैं। इसके कारण सागर जिले का शक्ति संतुलन गड़बड़ा गया है। 

सांची में J-BJP वालों का अपना भाजपा कार्यालय

रायसेन जिले की सांची विधानसभा सीट पर J-BJP और BJP के बीच की खाई साफ दिखाई देती है। बस स्टैंड स्थित भाजपा कार्यालय पर भाजपा के कार्यक्रम होते हैं और सागर रोड पर श्री राम परिसर के नाम से एक और कार्यालय खुला है जिसमें भाजपा के कार्यक्रम होते हैं परंतु BJP के कार्यकर्ताओं को नहीं बुलाया जाता केवल J-BJP के लोग शामिल होते हैं। 

इंदौर में सिलावट ने सिंधिया को फायदा पहुंचाया 

इंदौर की सांवेर विधानसभा सीट से विधायक तुलसीराम सिलावट का भाजपा में इतना तीखा विरोध नहीं है। इसका प्रमुख कारण यह है कि तुलसीराम सिलावट की कैलाश विजयवर्गीय गुट से कांग्रेस के जमाने की दोस्ती है। सिलावट भाजपा में शामिल हुए तो उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय और ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुलाकात करा दी। यह मित्रता तीनों के लिए फायदेमंद है। जहां तक सांवेर विधानसभा सीट के जमीनी कार्यकर्ताओं की बात है तो उनकी आवाज भोपाल में अब तक सुनाई नहीं दी है।

रघुराज कंसाना- मुरैना विधानसभा सीट पर उपचुनाव से ही भाजपा की जमीनी कार्यकर्ताओं के टारगेट पर हैं। कम से कम 25 प्रभावशाली नेता उनके खिलाफ खड़े हुए हैं। टिकट मिला तो चंबल का पानी फिर से अपना रंग दिखाएगा। 

ऐदल सिंह कंसाना- मुरैना की सुमावली विधानसभा सीट के नेता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की कृपा से 2018 का विधानसभा चुनाव जीत गए थे। फिर उन्हीं के साथ भाजपा में आ गए लेकिन उप चुनाव नहीं जीत पाए। चंबल के भाजपा कार्यकर्ताओं ने जो हाल रघुराज का किया वही है ऐदल सिंह का भी किया। 

गिर्राज दंडोतिया- चंबल संभाग की दिमनी विधानसभा सीट पर भी वही हुआ। सिंधिया के साथ आए गिर्राज दंडोतिया उपचुनाव हार गए। शिवमंगल सिंह तोमर दिमनी में भाजपा के पुराने नेता हैं और ज्यादातर भाजपा कार्यकर्ता उन्हीं के साथ लामबंद है क्योंकि शिवमंगल सिंह, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से जुड़े हुए हैं और यह इलाका तोमर का है। 

इमरती देवी- सिंधिया के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक 

जहां एक तरफ इंदौर में है तुलसी सिलावट ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के रास्ते की सारी बाधाएं दूर कर दी वहीं दूसरी तरफ डबरा विधानसभा सीट में इमरती देवी ने कैबिनेट मंत्री नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ मोर्चा खोलकर न केवल डबरा में तनाव की स्थिति बना दी बल्कि नरोत्तम मिश्रा जैसे नेता को सिंधिया विरोधियों के साथ खड़े होने पर मजबूर कर दिया। 

बृजेंद्र सिंह यादव- अशोकनगर की मुंगावली विधानसभा सीट पर विधायक एवं राज्यमंत्री बृजेंद्र सिंह की स्थिति बिल्कुल वही है जो सांची विधानसभा सीट पर डॉक्टर प्रभु राम चौधरी की है। भारतीय जनता पार्टी बिल्कुल अलग है। सांची में तो चौधरी ने अपना भाजपा कार्यालय बना लिया है परंतु मुंगावली में ऐसा भी कुछ नहीं है। 

जजपाल सिंह जज्जी- अशोक नगर विधानसभा सीट पर भाजपा नेता लड्डूराम कोरी के साथ भाजपा के कार्यकर्ता भी दिखाई देते हैं। जजपाल सिंह के साथ केवल उनके समर्थक दिखाई देते हैं। दरार नहीं बल्कि गहरी खाई है। जज्जी के जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कराने के लिए लड्डू राम कोरी ने ही कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
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सुरेश धाकड़- शिवपुरी जिले की पवई विधानसभा सीट से विधायक एवं लोक निर्माण विभाग के राज्यमंत्री सुरेश धाकड़ तो खुद ही भाजपा को अपने खिलाफ खड़ा कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने एक क्रिकेट टूर्नामेंट कराया जिसके बैनर होर्डिंग पोस्टर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराज सिंह चौहान, महा आर्यमन सिंधिया और सुरेश धाकड़ का फोटो था। भारतीय जनता पार्टी का चिन्ह भी नहीं था।

जसवंत जाटव- शिवपुरी जिले के करैरा विधानसभा सीट से सिंधिया समर्थक जसवंत जाटव उपचुनाव में हारने के बाद खुद ही भारतीय जनता पार्टी से दूर हो गए। ज्योतिरादित्य सिंधिया की कृपा से राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के चेयरमैन बन गए हैं लेकिन जसवंत जाटव की जमीनी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ औपचारिक राम-राम भी नहीं है।

रणवीर जाटव- भिंड जिले की गोहद विधानसभा पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की कृपा से रणवीर मध्यप्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम के अध्यक्ष तो बन गए लेकिन चुनाव के टिकट पर लाल सिंह आर्य की दावेदारी है और लाल सिंह कच्चे खिलाड़ी नहीं है। स्थानीय स्तर के पार्टी की बैठकों में रणवीर जाटव की उपस्थिति नहीं के बराबर रहती है।

मेहगांव विधानसभा सीट पर ओपीएस भदौरिया, ग्वालियर पूर्व विधानसभा पर मुन्नालाल गोयल, हाटपिपलिया विधानसभा से मनोज चौधरी एवं बमोरी विधानसभा से महेंद्र सिंह सिसोदिया ऐसे नेता हैं जिन्होंने खुद को ज्योतिरादित्य सिंधिया तक ही सीमित कर रखा है। जहां एक तरफ भाजपा में संगठन के प्रति निष्ठा की वचनबद्धता दोहराई जाती है वहीं दूसरी तरफ यह नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति निष्ठा का संकल्प दोहराते हैं। 

प्रद्युम्न सिंह तोमर- सिंधिया, पवैया के घर हो आए परंतु स्थिति चिंताजनक है

वैसे तो प्रद्युम्न सिंह तोमर पूरे मध्यप्रदेश में एक ऐसे नेता है जो चुनाव जीतने के लिए अहंकार तो दूर की बात आत्म सम्मान भी घर पर छोड़ कर निकलते हैं परंतु ग्वालियर विधानसभा सीट उनके लिए आसान नहीं है। यह जयभान सिंह पवैया का गढ़ है। प्रद्युम्न सिंह तोमर के लिए ज्योतिरादित्य सिंधिया, अपने पिता के सबसे बड़े शत्रु जयभान सिंह पवैया से मिलने तक चले गए। ना केवल प्रद्युम्न सिंह तोमर का रास्ता साफ किया बल्कि उन्हें चप्पल भी पहना दी, फिर भी सब कुछ ठीक नहीं है क्योंकि पवैया को प्रद्युम्न सिंह पसंद नहीं है। 

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