BHOPAL, भारत का एकमात्र शहर जहां इंसान और टाइगर साथ साथ रहते हैं - MP wildlife NEWS

भोपाल
। जब देश के कई इलाकों में टाइगर द्वारा इंसानों पर हिंसक हमले करने और इंसानों द्वारा बाघ का शिकार करने की खबरें आ रही है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एकमात्र ऐसा शहर है जहां इंसान और टाइगर, साथ-साथ रहते हैं। दोनों एक दूसरे को रास्ता देते हैं और कोई किसी को डिस्टर्ब नहीं करता। 

15 टाइगर ने पूरे भोपाल का बंटवारा कर लिया है

वर्तमान में भोपाल जिले की सीमा में आने वाले 1 क्षेत्र में 15 टाईगर हैं। इन सभी ने पूरे इलाके का बटवारा कर रखा है। हर नया टाइगर अपनी नई टेरिटरी बना लेता है। विकास की दौड़ धूप में कुछ ऐसे इलाकों में इंसानों का आना-जाना शुरू हो जो वर्षों पहले टाइगर की टेरिटरी हुआ करते थे। MANIT BHOPAL और भोज यूनिवर्सिटी जैसे बड़े सरकारी संस्थानों का का एक बड़ा हिस्सा टाइगर की टेरिटरी में आता है। बाघ भी अपने पूरे इलाके का चक्कर लगाते रहते हैं परंतु ना तो इंसान उनका शिकार करते हैं और ना ही भाग इंसानों पर कोई हमला करते हैं। दोनों एक दूसरे को स्वतंत्रता देते हैं और उनके लिए प्रतीक्षा करते हैं। 

इसे अर्बन टाइगर मैनेजमेंट नाम दिया गया है

बाघों और इंसानों की बीच बने इस समन्वय पर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) के स्टूडेंट ने तीन साल रिसर्च की है। इसे अर्बन टाइगर मैनेजमेंट नाम दिया गया है। इसकी रिपोर्ट डब्ल्यूआईआई को भेजी गई है। इस पर एक डाक्यूमेंट्री भी बनाई जाएगी ताकि लोग समझें कैसे मनुष्य और बाघ कैसे साथ रहते हैं।

कैसे जुटाए साक्ष्य
रिसर्च के लिए 3 साल तक ट्रैप कैमरे, थर्मल इंफ्रारेड कैमरे से बाघों के वीडियो कैप्चर किए। उनके मूवमेंट और पगमार्कों को जुटाया। बाघों का पीछा करके हरेक का डेटा बैंक तैयार किया।

कहां कितने बाघ
2018 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 2967 बाघ हैं। सबसे अधिक 526 बाघ मप्र में हैं। कान्हा पार्क में 118, बांधवगढ़ में 115, पन्ना में 45, पेंच में 56, सतपुड़ा में 45 और संजय डुबरी में 6 और रातापानी में 45 बाघ हैं।

wildlife new update- बाघों में सहनशीलता बढ़ गई है

रिसर्च में सामने आया है कि भोपाल में बाघिन और यहां शावकों में सहनशीलता की क्षमता विकसित हुई है। वे इंसान को देखकर आक्रमक नहीं होते। बाघ संघर्ष से बचने के लिए तब तक छिपे रहते हैं, जब तक इंसानी आवागमन कम न हो जाए। बाघों का स्वभाव बदला है। वे अपना मूवमेंट दिन की बजाय रात को करते नजर आए।
आलोक पाठक, डीएफओ भोपाल वन मंडल