MP NEWS- वन मंत्री और अधिकारियों की 32 लाख की विदेश यात्रा का हिसाब मांगा

भोपाल
। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने शिवराज सिंह चौहान सरकार के वन मंत्री एवं वन विभाग के सीनियर ऑफिसर पर आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने निजी आनंद के लिए विदेश यात्रा की और सरकारी खजाने से 32 लाख रुपए खर्च किए, जबकि इसी यात्रा पर वन मंत्री और दो अधिकारियों ने 3 महीने पहले 15 लाख रुपए खर्च किए थे। 

मंत्री और अधिकारी स्टडी टूर पर गए थे परंतु रिपोर्ट लापता है

श्री अजय दुबे ने बताया कि कर्ज से डूबे मध्यप्रदेश के वन मंत्री विजय शाह, पीसीसीएफ आरके गुप्ता और एपीसीसीएफ़ शुभ रंजन सेन 21 अगस्त से 30 अगस्त 2022 स्टडी टूर और चीतों के नाम पर करीब 32 लाख रुपए का तंजानिया और साउथ अफ्रीका का दौरा कर आए लेकिन आज तक न स्टडी रिपोर्ट सार्वजनिक न हुई न अफ्रीकी चीते कूनो नेशनल पार्क आए।

तंजानिया टूर- अप्रैल में 15 लाख और अगस्त 32 लाख का, ऐसा कैसे

श्री अजय दुबे ने कहा कि पर्यटन से आय बढ़ाने के तरीके सीखने अफ्रीका और तंजानिया गए वन मंत्री विजय शाह और 2 अफसरों के लिए अप्रैल 2022 में यात्रा का खर्च 15 लाख रुपए था लेकिन यही खर्चा अगस्त 2022 में करीब 32 लाख रुपए हो गया। जब वन मंत्री अपने ही राज्य में डबल खर्चा बढ़ाएंगे तो आय कैसे बढ़ेगी ? 

श्री दुबे ने बताया कि हमे आरटीआई से मिले दस्तावेज के बाद वन विभाग से कुछ सवाल हैं, जिनके जवाब न मिलने पर प्रधानमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी के समक्ष जांच और मप्र टाइगर फाउंडेशन सोसायटी के स्पेशल ऑडिट कार्यवाही के लिए दस्तावेज रखेंगे।

यहां यह बताना उचित है कि जब इस दौरे पर लाखो रुपए खर्च होने थे तब चीता प्रोजेक्ट के तहत चीतों के 17 सितंबर 22 को कूनो लाने के लिए लिए मप्र सरकार को केंद्र सरकार से राशि और इंडियन ऑयल से सीएसआर फंड नही मिला था।

1-कर्ज से डूबे मध्यप्रदेश के वन मंत्री विजय शाह,पीसीसीएफ फॉरेस्ट आर के गुप्ता और एपीसीसीएफ शुभ रंजन सेन को साउथ अफ्रीका और तंजानिया में वाइल्ड लाइफ की स्टडी टूर से क्या ऐसा अनोखा अनुभव मिला जिससे मध्यप्रदेश का भला होगा?स्टडी रिपोर्ट कहाँ है?

2- वन विभाग के अधीन एमपी टाइगर फाउंडेशन सोसायटी के पैसे क्यों खर्च कर बर्बाद हुए ? जब टूर सही था तो शासन से ही अनुमति लेकर यात्रा करनी थी।सोसायटी के अध्यक्ष वन मंत्री हैं इसलिए आसानी से पैसे खर्च किए ।कूनो में सहारिया आदिवासियों पर कोई खर्च नही हुआ न कोई अफ्रीका गया।

3- साउथ अफ्रीका और नामीबिया से चीते लाने के लिए चीता प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी एनटीसीए, मप्र सरकार के वन अधिकारी पूर्व में वहा लंबे समय रुक कर विदेश दौरे कर चुके थे,इस दौरे में क्या खास बात थी ?तंजानिया से तो चीते लाने की बात भी नहीं है और साउथ अफ्रीका से चीते आज तक नही मिले 

4-चीता प्रोजेक्ट तो भारत सरकार की एजेंसी एनटीसीए का है जिसके तहत सब प्रबंधन हो रहा है फिर मप्र सरकार कैसे अलग से दौरे कर रही है?क्या एनटीसीए से अनुमति ली थी?गौरतलब है कि चीता प्रोजेक्ट की मान सुप्रीम कोर्ट मॉनिटरिंग करता है।हम उनको भी इससे अवगत कराएंगे।

5-अप्रैल 2022 में स्टडी टूर का खर्च १५ लाख रुपए था लेकिन अगस्त 2022 में 32 लाख रुपए से अधिक खर्च कैसे हुआ ?क्यों खर्चीले महंगे होटल और विदेशी यात्रा की गई ?क्यों यात्रा दल वाले अपने परिजनों को सरकारी खर्चे पर ले गए ?

6-मप्र में वनों की कटाई ,अतिक्रमण और वन्य प्राणियों का अनियंत्रित शिकार रोकने की बजाय वनों में पर्यटन बढ़ाने के लिए लाखो रुपए क्यों खर्च किए ?पर्यटन बढ़ाने के लिए तो दूसरी तरफ मप्र पर्यटन बोर्ड भी जमकर विदेश दौरे कर रहा है।
मप्र वन विभाग की लापरवाही और खराब छवि के कारण ही गुजरात ने मप्र को एशियाई सिंह आज तक नही दिए।

श्री दुबे ने कहा कि, कल ही मुख्यमंत्री जी ने भ्रष्टाचार को कोढ़ कहा है और इसे खत्म करने के लिए उनको शिकायत देने का अनुरोध किया है। हम जल्द ही शिकायत दर्ज कराएंगे। चीतों के प्रबंधन में गड़बड़ी के मामले लगातार सार्वजनिक करेंगे।