MBA वाले व्यवसायिक शिक्षकों की सेवा समाप्ति पर हाई कोर्ट का स्टे- MP karmchari news

जबलपुर
। लोक शिक्षण संचनालय द्वारा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के दौरान शैक्षणिक योग्यता के नाम पर व्यवसायिक शिक्षकों की सेवा समाप्ति की जा रही है। इसी क्रम में कुछ MBA डिग्री होल्डर्स को पद के अयोग्य बताकर सेवा समाप्त कर दी गई थी परंतु हाईकोर्ट ने उनकी सेवा समाप्ति के आदेश को स्थगित कर दिया है। 

श्री शैलेंद्र यादव, संदीप कुमार, सुनील द्विवेदी, निधि साहू, राहुल रावत, अनिल परमार, शांति उईके, हिना रावत, स्कूल शिक्षा विभाग में आउटसोर्सिंग संविदा, व्यवसायिक शिक्षक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आयुक्त लोक शिक्षण भोपाल द्वारा जारी आदेश दिनाँक 17/07/21 के द्वारा नवीन चयन प्रक्रिया निर्देशित की गई थी। पुराने व्यवसायिक शिक्षकों द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में चयन प्रक्रिया के विरुद्ध याचिकायें दायर की गई थी। 

केस में सुनवाई के बाद, शासन द्वारा कोर्ट के समक्ष हलफनामा दायर कर कहा गया की पूर्व से कार्यरत व्यवसायिक शिक्षकों को किसी चयन प्रक्रिया में शामिल नही होना पड़ेगा, ना ही उन्हें सेवा से पृथक किया जायेगा। परंतु, आदेश दिनाँक 17/07/21 के आधार पर, डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन करवाना पड़ेगा। उपरोक्तानुसार याचिकाओं का निराकरण कर दिया गया था।

उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में, डाक्यूमेंट्स अनुवीक्षण के दौरान, शैलेंद्र सिंह यादव एवं अन्य याचिकाकर्ता को इस आधार पर समिति द्वारा नियुक्ति हेतु अपात्र कर दिया गया था कि उपरोक्त व्यवसायिक शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, MBA (मार्केटिंग एवं रिटेल) नही हैं। 

पीड़ित होकर शैलेंद्र यादव एवम अन्य द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष रिट याचिका द्वारा कर की गई थी। उनकी ओर से पैरोकार अधिवक्ता अमित चतुर्वेदी,  उच्च न्यायालय जबलपुर, द्वारा कोर्ट के समक्ष तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा धारित MBA डिग्री में रिटेल एवम मार्केटिंग विषय सम्मिलित हैं। उपरोक्त आधार पर पूर्व में नियुक्ति प्रदान की गई थी परन्तु, अनुवीक्षण समिति द्वारा हाई कोर्ट के आदेश के विपरीत, इस आधार पर याचिकाकर्ता को नियुक्ति हेतु अपात्र करना विधि विरुद्ध है कि याचिकाकर्ता के पास शैक्षणिक योग्यता नहीं है।

सुनवाई के पश्चात, अधिवक्ता अमित चतुर्वेदी के तर्कों से सहमत होकर, उच्च न्यायालय जबलपुर चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ ने, शासन से जबाब तलब करते हुए,  याचिकाकर्ता को सेवा से पृथक करने पर रोक लगा दी है।
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