MP NEWS- सरकार ने 5 लाख रिटायर्ड कर्मचारी लावारिस छोड़े, दिवाली से पहले पेंशन तक नहीं

भोपाल
। माना कि चुनावी साल है लेकिन सिर्फ वही वोट के लिए काम करना सरकार के लिए अच्छी बात नहीं है। सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 10 लाख से ज्यादा स्थाई और अस्थाई कर्मचारियों को दीपावली से पहले सैलरी एडवांस दे दिया परंतु लगभग 5 लाख रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन नहीं दी। छत्तीसगढ़ के कारण महंगाई राहत का मुद्दा भी सॉल्व नहीं किया जा रहा है। शायद सरकार, पेंशनरों को बोझ समझती है।

मुख्यमंत्री ने आदेश में देरी कर दी, इसलिए एडवांस पेंशन पॉसिबल नहीं

बुजुर्ग कहते हैं कि करने वालों के लिए कोई राह मुश्किल नहीं होती और नहीं करने वालों के लिए बहाने हजार। इस केस में कुछ ऐसा ही है। सरकार की तरफ से दलील दी गई है कि रिटायर्ड कर्मचारियों को एडवांस पेंशन देने के लिए प्रक्रिया बहुत लंबी है। क्योंकि पेंशन का भुगतान सरकारी खजाने से नहीं बल्कि बैंक से होता है। इसके लिए बैंक के हेड क्वार्टर में सिस्टम अपडेट करवाना होगा। अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने सैलरी एडवांस के निर्देश देरी से दिए। यदि समय मिलता तो एडवांस पेंशन का भुगतान किया जा सकता था। 

कितनी अजीब बात है मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार एक तरफ बुजुर्गों को तीर्थ यात्रा करवाती है और दूसरी तरफ उनके दैनिक नियमित खर्चा और दवाइयों के लिए पेंशन नहीं देती।

छत्तीसगढ़ का मुद्दा भी सॉल्व नहीं कर रही सरकार

यदि चाहे तो यह मुद्दा 1 सप्ताह में सॉल्व हो जाएगा परंतु करना नहीं चाहते इसलिए 22 साल से पेंशनरों को महंगाई राहत का मामला पेंडिंग है। मध्य प्रदेश के रिटायर्ड कर्मचारियों को 5% महंगाई राहत इसलिए नहीं दी जा रही है क्योंकि छत्तीसगढ़ सरकार ने अपने रिटायर कर्मचारियों को महंगाई राहत देने से इनकार कर दिया है।

छत्तीसगढ़ नहीं मध्यप्रदेश में उलझा रखा है धारा 49 का मामला

छत्तीसगढ़ ने धारा 49 खत्म करने की सहमति मांगी, लेकिन मध्यप्रदेश शासन कोई रुचि नहीं ले रहा। प्रदेश में पेंशनर्स का मामला राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के अनुसार है, जिसमें शर्त है कि 2000 तक के जो कर्मचारी रिटायर हुए हैं, उन पेंशनर्स को पेंशन पर 74% राशि मप्र खर्च करेगा और 26% छत्तीसगढ़ को देना होगा। यह प्रावधान संसद द्वारा राज्य पुनर्गठन अधिनियम 2000 के अनुसार धारा 49 में किए गए हैं।

यही धारा 49 पेंशनर्स के देयकों के मामले में दोनों राज्यों की सहमति जरूरी है। यह धारा दोनों राज्यों की सहमति के बाद संसद से खत्म होगी। इसी वजह से पिछले 22 सालों से पेंशनर्स का मामला अटका हुआ है। छत्तीसगढ़ ने 2017 में तत्कालीन रमन सिंह सरकार में मुख्य सचिव ने सहमति-पत्र जारी किया था, जिसमें धारा 49 खत्म करने के लिए मप्र से सहमति देने का अनुरोध किया था, लेकिन उस दौरान मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने रुचि नहीं ली और पेंशनर्स का मामला अटक गया।