MP KISAN NEWS- वैज्ञानिकों ने बनाई ऐसी मटर जो किसानों को मालमाल कर देगी

ग्वालियर
। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी मटर बनाई है जो किसानों को मालामाल कर देगी। उत्पादन 30 प्रतिशत तो बढ़ेगा ही साथ ही खेत में गर्मी के कारण खराब नहीं होगी और कोल्ड स्टोर में रखने पर ना तो रंग बदलेगा और ना ही स्वाद। 

उत्तरभारत में मटर का सबसे अच्छा बीज IPFD 10-12

पत्रकार श्री अजय उपाध्याय की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान कानपुर के कृषि विज्ञानी डा. अशोक परिहार और डा. जेपी दीक्षित ने नई किस्म तैयार की है, जिसका नाम IPFD 10-12 रखा गया है। इस नई किस्म को तैयार करने में करीब दस साल लगे हैं। कृषि विज्ञानियों का कहना है IPFD 10-12 बीज से उत्तर भारत में मटर का उत्पादन 30 प्रतिशत बढ़ने की उम्मीद है।

ग्वालियर संभाग में IPFD 10-12 मटर की खेती 3 जिलों में

झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, ग्वालियर, दतिया एवं शिवपुरी आदि के किसान इसका उत्पादन करने में रुचि दिखा रहे हैं। इस बीज के दाने में मिठास कम रहने से मधुमेह रोगी भी इसका स्वाद ले सकेंगे। राजमाता विजयाराराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के डायरेक्टर आफ रिसर्च संजय शर्मा का कहना है कि बीज को बढ़ावा देने के लिए दतिया, भिंड व ग्वालियर के किसानों को बीज की उपलब्धता कराई गई है।

सूखी मटर को कोल्ड स्टोर ​की जरूरत ही नहीं 

रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के कृषि विज्ञानी डा. सुशील चतुर्वेदी का कहना है कि इस बीज से तैयार मटर का दाना सूखने पर रंग नहीं बदलता। सूखी मटर को कोल्ड स्टोर में रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। किसान अब खुद हरी मटर को डिब्बा पैक कर बाजार में ऊंचे दाम पर बेच सकेंगे।

दो बार की सिंचाई में फसल तैयार हो जाएगी

डा. चतुर्वेदी का कहना है मटर की फसल 120 से 125 दिन में तैयार होगी। वर्तमान मटर की फसल के लिए एक बार सिंचाई की आवश्यकता होती है, जबकि इस नई किस्म में दो पानी दिया जाता है। इसकी बुवाई अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से 10 नवंबर तक होनी चाहिए, जिससे इसकी पैदावार बेहतर होती है तथा 100 किग्रा प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है।

IPFD 10-12 मटर की पैदावार 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

इसमें डाई अमोनियम सल्फेट की खाद देने की आवश्यकता होती है, जिससे पैदावार 28 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो जाती है। इसकी फलियां तोड़कर सब्जी के लिए बेची जा सकती हैं और यह मटर सूखने के बाद सब्जी से लेकर चाट, नमकीन आदि के लिए बहुत उपयोगी होती है। बीज में रोग प्रतिरोधक क्षमता होने से कीट व बीमारियों से बचाव रहेगा।

IPFD 10-12 आम मटर की प्रजाति से डेढ़ गुना अधिक 

आइपीएफडी 10-12 किस्म की पैदावर आम मटर की प्रजाति से डेढ़ गुना अधिक है और मिठास कम होने के साथ इसका दाना सूखने के बाद भी हरा व गोल रहेगा। उत्तर भारत में इसकी पैदावार पिछले बीजों से 30 प्रतिशत अधिक होगी। किसान अब हर मौसम में मटर के हरे दाने छोटे पैकेट बनाकर बाजार में बेच सकेंगे। इससे उनकी आय भी बढ़ेगी।
डा. एसके चतुर्वेदी, कृषि विज्ञानी, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी।