BHOPAL गैस: टीआई सहित 10 भर्ती, 70 परिवार पलायन कर गए- NEWS TODAY

भोपाल
। ईदगाह हिल्स इलाके में क्लोरीन गैस के रिसाव के कारण पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है। रेस्क्यू में लगे टीआई सौरभ पांडे सहित 10 लोग अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके हैं। 70 परिवार पलायन कर गए थे। 

गैस रिसाव के बाद इलाके में ड्यूटी कर रहे शाहजहांनाबाद TI सौरभ पांडे की तबीयत रात में बिगड़ गई। उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ होने पर 10 से ज्यादा लोगों को हमीदिया में भर्ती कराया गया है। क्लोरीन गैस सिलेंडर से लीक हुई। पहले इसके टैंक से रिसने की बात सामने आई थी।

सबसे पहले जानते हैं, क्या है पूरा मामला
ईदगाह हिल्स स्थित मदर इंडिया कॉलोनी में बुधवार शाम 6 बजे गैस का रिसाव शुरू हुआ। बस्ती में रहने वाले लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इससे लोग घरों से बाहर निकल गए। महिला समेत 3 लोगों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। मंत्री विश्वास सारंग, महापौर मालती राय, कलेक्टर अविनाश लवानिया, निगम कमिश्नर केवीएस चौधरी कोलसानी मौके पर पहुंचे।

छानबीन करने पर पता चला कि नगर निगम के फिल्टर प्लांट के गैस का रिसाव हो रहा है। लोग डर गए। 70 से ज्यादा परिवार घरों में ताला डालकर चले गए। इधर कलेक्टर ने बयान दिया कि कोई समस्या वाली बात नहीं है। सामान्य गैस रिसाव है। सबकुछ नियंत्रण में ले लिया गया है। इसके कारण लोग निश्चिंत हो गए। कुछ घंटे बाद प्रभावितों की संख्या बढ़कर 10 के पार पहुंच गई। शाहजहांनाबाद TI सौरभ पांडे समेत अन्य पुलिसकर्मी भी गैस की चपेट में आ गए और उन्हें राजा भोज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। सभी को सांस लेने की तकलीफ हो रही थी। 

एक्सपर्ट से जानिए कितनी खतरनाक है क्लोरीन गैस
गांधी मेडिकल कॉलेज (भोपाल) के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. लोकेंद्र दवे का कहना है कि इस प्रकार का गैस रिसाव जब भी हो, सबसे पहले उस एरिए को छोड़कर दूर जाना चाहिए। गैस रिसाव वाले इलाके में फव्वारे, फायर ब्रिगेड से पानी का छिड़काव करना चाहिए। क्लोरीन पानी में घुल जाती है। इस गैस के असर से आंखों में जलन और फेफड़ों में सूजन हो सकती है। ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति कितनी देर गैस के एक्सपोजर में रहा और उसके लंग्स में कितनी गैस पहुंची। यदि ज्यादा गैस फेफड़ों में पहुंचती है तो लम्बे समय की या फिर हो सकता है कि स्थायी दिक्कत हो जाए।