तलाक से पहले की गई दूसरी शादी को कानूनी मान्यता कैसे मिल सकती है, जानिए- Legal Advice

हिंदू धर्म के अनुसार विवाह एक संस्कार है और किसी भी स्थिति में विवाह विच्छेद नहीं किया जा सकता परंतु भारत में प्रचलित कानूनों के अनुसार विवाह एक अनुबंध है जो नियमों का उल्लंघन करने पर टूट सकता है। इसलिए तलाक का प्रावधान किया गया है, लेकिन तलाक की प्रक्रिया को कुछ इस प्रकार का बनाया गया है कि यदि पति पत्नी के विवाद के बाद उन दोनों के साथ रहने की 1% गुंजाइश भी है तो उनके रिश्ते को टूटने से बचाया जा सके। 

न्यायालय में तलाक के लिए आवेदन देने के बाद और तलाक की डिक्री पारित होने से पहले यदि महिला या पुरुष दूसरा विवाह कर ले तो ऐसा विवाह शून्य माना जाता है परंतु आज हम आपको बताएंगे कि तलाक की डिक्री पारित होने से पहले यदि महिला या पुरुष दूसरा विवाह कर ले तो किन परिस्थितियों में उसे कानूनी मान्यता मिल जाती है। पढ़िए इस विषय में कुछ महत्वपूर्ण न्याय दृष्टांत:- 

शंकरन सुकुमारन बनाम क्रष्णन सरस्वती:- 

उक्त वाद में पति-पत्नी द्वारा आपसी सहमति से तलाक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिए एवं तलाक की डिक्री पारित होने से पहले ही पति ने किसी अन्य स्त्री के साथ पुनः विवाह कर लिया प्रथम पत्नी ने तलाक की डिक्री से पूर्व हुए विवाह को अवैध मानते हुए याचिका दायर की। 

इस पर केरल उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट केरल) ने अभिनिर्धारित किया कि तलाक दस्तावेज से स्पष्ट था कि दोनो पक्षकार यह निष्ठापूर्वक समझ चुके थे कि उनके संबंध पति-पत्नी के नहीं रहे और भविष्य में रहने की संभावना भी नहीं है एवं आपसी सहमति से तलाक दस्तावेज में हस्ताक्षर किए गए थे।

अतः न्यायालय ने कहा कि इन परिस्थितियों में आरोपी द्वारा सदभावना से यह समझते हुए कि उसका प्रथम विवाह समाप्त हो चुका है इसलिए आरोपी का दूसरा विवाह किसी भी प्रकार से अवैध नहीं होगा एवं आरोपी पुनः विवाह का दोषी भी नहीं होगा। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665

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