JABALPUR NEWS- पढ़िए बच्चों की फीस से स्कूल के फादर ने क्या क्या खरीद

मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में धर्मगुरु पीसी सिंह के बारे में EWS द्वारा जिस प्रकार के खुलासे किए जा रहे हैं। काफी चौंकाने वाले हैं। मिशनरी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की फीस से फादर ने अपने लिए 9 लग्जरी गाड़ियां खरीदी, सबसे महंगी कार लैंड रोवर है। । 32 महंगी घड़ियां खरीदी। स्वर्ण आभूषण जवाहरात, करोड़ों की प्रॉपर्टी बनाई। उनके पास से 18000 डॉलर भी मिले हैं। 

धार्मिक आयोजन और धर्म का प्रचार करने के लिए उस धर्म के अनुयाई दान देते हैं परंतु  मिशनरी स्कूलों का संचालन करने वाली संस्था के प्रमुख बिशप पीसी सिंह (जिन्हें बच्चे फादर कहते थे) ने बच्चों की फीस से धार्मिक आयोजन किए। उनके धर्म की संस्था में काम करने वाले लोगों को पैसे दिए। बच्चों की फीस से स्कूल का विकास नहीं बल्कि धर्म का प्रचार किया। भारत का कानून कहता है कि स्कूल की फीस से केवल स्कूल का विकास किया जा सकता है। स्कूल का संचालन नो प्रॉफिट नो लॉस पर होना चाहिए। स्कूल फीस का उपयोग किसी भी दूसरे काम में करना अपराध है। 

द बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया के बिशप पीसी सिंह मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं। 12वीं के बाद कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपने भविष्य की राह चुन ली और ईसाई बन गए थे फिर पास्टर की शिक्षा के लिए दिल्ली गए। पढ़ाई पूरी की और एक अच्छे विद्यार्थी साबित हुए। उन्हें मध्यप्रदेश के जबलपुर भेजा गया। यहां एक चर्च में 5 साल तक फादर रहे। 

स्कूल की जमीन पर बिल्डिंग बनाकर किराए पर दे दी

EOW की टीम ने बताया कि बिशप पीसी सिंह ने अपने बेटे पीयूष पॉल को क्राइस्ट चर्च बॉय स्कूल का प्रिंसिपल बनाया है। बताया जाता है कि बिशप ने सरकार से स्कूल खोलने के नाम पर जमीन ली, लेकिन उस जगह आलीशान बिल्डिंग बनाकर किराए पर दे दिया। इससे लाखों रुपए किराया भी आ रहा है। इसके अलावा, नेपियर टाउन में शासकीय जमीन को लीज पर लिया। यहां इंडियन ओवरसीज बैंक, भारतीय खाद्य निगम और बारात घर को किराए पर दे रखा था।

स्कूल विकास के नाम पर टीचर से लेता 5-5 हजार रुपए

पता चला है कि बिशप हर टीचर से हर महीने 5 हजार रुपए स्कूल डेवलपमेंट के नाम पर लेता था। इसकी रसीद भी उन्हें दी जाती है। किसी को नहीं पता था कि उनके डोनेशन और स्कूल की फीस का उपयोग कहां किया जा रहा है।