किसी लेखक की लोक कृति पर लांछन लगाना कब मानहानि का अपराध नहीं होगा जानिए- legal advice

Bhopal Samachar
0
एक कलाकार का काम होता है नई नई रचनाएँ करना। रचनाकार व्यक्ति कविता, नाटक, कहानी, कोई रिपोर्ट, पुस्तकें आदि लिखता है। जब उसकी रचनाएँ सार्वजनिक होती है तब उसकी समीक्षा भी की जाती है और इस दौरान प्रशंसा के साथ आलोचना भी होती है। सवाल यह है कि लेखक की रचना की आलोचना करना, क्या उसकी मानहानि का अपराध माना जाएगा, आइए जानते हैं। 

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 499 (अपवाद क्रमांक 06) की परिभाषा

किसी  साहित्यकार, चित्रकार, नाटककार, आविष्कारकर्ता, वस्तु शिल्पकार, संपादक, संवाददाता आदि की लोक कृति (रचनाओं) के बारे में बिना किसी भेदभाव या दुर्भावना के सदभावना-पूर्वक की गई समीक्षा एवं आलोचना मानहानि का अपराध नहीं होगा।

उधारानुसार:- 'क' एक लेखक हैं एवं वह एक मैगजीन लिखता है एवं मैगजीन की कहानियों में कुछ गलत उच्चारण शब्द छप जाते हैं। समीक्षक इसकी आलोचना करते हैं और इसे प्रबंधन की कमी घोषित करते हैं। क्योंकि उन्होंने कोई भेदभाव नहीं किया और आलोचना के योग्य हिस्से की निंदा की, अत: यह मानहानि का अपराध नहीं होगा। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665

इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com
भोपाल समाचार से जुड़िए
कृपया गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें यहां क्लिक करें
टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करने के लिए यहां क्लिक करें
व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए  यहां क्लिक करें
X-ट्विटर पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
Facebook पर फॉलो करने के लिए यहां क्लिक करें
समाचार भेजें editorbhopalsamachar@gmail.com
जिलों में ब्यूरो/संवाददाता के लिए व्हाट्सएप करें 91652 24289

Post a Comment

0 Comments

Please Select Embedded Mode To show the Comment System.*

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!