MPMSU परीक्षा घोटाला- रिजल्ट के बाद पैसे मिले तो रिवैल्युएशन में पास कर दिया

जबलपुर
। Madhya Pradesh Medical Science University, Jabalpur परीक्षा एवं रिजल्ट घोटाले में नए-नए खुलासे हो रहे हैं। बच्चे कितनी भी पढ़ाई करें, पास वही होता था जिसके पैसे आ जाते थे। जो स्टूडेंट्स परीक्षा से पहले पैसे नहीं देते थे तो उन्हें फेल कर दिया जाता था, रिजल्ट आने के बाद पैसे मिल जाने पर रिवैल्युएशन में पास कर देते थे। कुल मिलाकर यूनिवर्सिटी, मार्कशीट और डिग्री छापने का केंद्र बन गई थी।

नियम ना कानून, स्पेशल री-वैल्यूएशन कराकर 13 स्टूडेंट्स पास कर दिए

गड़बड़ी करने वालों में विवि के तत्कालीन कुलपति डॉ. टीएन दुबे और इंचार्ज रजिस्ट्रार डॉ. जेके गुप्ता के नाम लिए जा रहे हैं। आरोप है कि इन दोनों ने विवि की एग्जाम कंट्रोलर डॉ. वृंदा सक्सेना को 12 रोल नंबर लिखकर दिए और कहा कि इन्हें पास करना है। वीसी दुबे के ऊपर खुद की हैंड राइटिंग में रोल नंबर लिखकर देने के आरोप हैं। इनके अलावा एमबीबीएस, बीडीएस और एमडीएस के 13 स्टूडेंट को स्पेशल री-वैल्यूएशन का फायदा देकर पास कर दिया गया, जबकि यूनिवर्सिटी के अध्यादेश में स्पेशल री-वैल्यूएशन का नियम ही नहीं है। यह वे स्टूडेंट थे, जो री-वैल्यूएशन में भी दो बार फेल हो गए थे। इन री-वैल्यूएशन की कॉपियों की जांच की गई तो इसमें ओवर राइटिंग मिली। 

रिकॉर्ड में मिला 278 मुन्ना भाई मिले

इसके अलावा 278 स्टूडेंट के नाम मैच नहीं हुए। यह ऐसे स्टूडेंट हैं, जिनका नामांकन दूसरे नाम से हुआ और एग्जाम अलग स्टूडेंट ने दिए। यानी एनरोलमेंट अलग नाम से और एग्जाम देने वाला अलग स्टूडेंट। यानी कि 278 मुन्ना भाई थे जो घर पर बैठे थे और उनकी जगह कोई दूसरा डॉक्टर पर पर लिख रहा था। इस तरह के मामलों में दोनों व्यक्तियों के खिलाफ FIR का प्रावधान है।

डॉ. वृंदा सक्सेना- इनके पास से नियम विरुद्ध ग्रेस के नंबर मिलते थे

यूनिवर्सिटी के तत्कालीन एग्जाम कंट्रोलर डॉ. वृंदा सक्सेना पर आरोप है कि उन्होंने अवकाश पर रहते हुए सरकारी ई-मेल के बजाय जी-मेल का उपयोग करके कॉलेजों में प्रैक्टिकल के नंबर दिए। इतना ही नहीं, स्टूडेंट को जमकर थ्योरी और प्रैक्टिकल में ग्रेस दिए गए, जबकि एक भी सब्जेक्ट में ग्रेस का नियम नहीं है। यह तमाम खुलासे उस पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट में हुए, जो हाईकोर्ट जबलपुर के आदेश पर शासन ने गठित की थी।

कुलसचिव डॉ. प्रभात बुधौलिया ने जांच में बाधा उत्पन्न की

जांच समिति ने रिपोर्ट में यह भी लिखा- रजिस्ट्रार ने परीक्षा कराने वाली एजेंसी से रिश्वत की मांग की, कुलपति ‘वन मेन शो’ चलाते थे। रजिस्ट्रार डॉ. जेके गुप्ता ने परीक्षा कराने वाली एजेंसी से रिश्वत मांगी। वर्तमान कुलसचिव डॉ. प्रभात बुधौलिया ने दस्तावेज उपलब्ध कराने में असहयोग किया। सरकारी ई-मेल के बजाय जी-मेल के इस्तेमाल से एग्जाम की विश्वसनीयता कम हुई है। सभी एग्जाम को संदेह के घेरे में बताया। यूनिवर्सिटी अपने अधिनियम के तहत संचालित नहीं हो रही है। कुलपति अपनी मनमानी करते थे। एजेंडे से हटकर चलाते हैं अपना एजेंडा। वन मेन शो चलाते थे।

MPMSU NEWS- कौन-कौन सी परीक्षाओं में घोटाला हुआ है

प्रदेश में वर्ष 2011 में मेडिकल यूनिवर्सिटी की शुरुआत जबलपुर में की गई। वर्ष 2015 में पहली बार परीक्षा ली गई। इसमें एमबीबीएस, डेंटल, नर्सिंग, आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथी, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, सिद्ध, पैरामेडिकल और अन्य मेडिकल डिग्री व डिप्लोमा संचालित करने वाले कॉलेजों की परीक्षा कराई जाती थी। परीक्षाओं में गड़बड़ियां की शिकायत मिलने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर 14 अक्टूबर 2021 को पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था।