कोर्ट में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप, मानहानि के तहत दंडनीय होगा या नहीं जानिए- legal advice

जब कोई आपराधिक या सिविल मामला न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत होता है तब दोनों पक्षों द्वारा सुनवाई होती है एवं वकीलों द्वारा या स्वयं पक्षकारों द्वारा बहस का मौका दिया जाता है एवं साक्षियों की भी परीक्षा की जाती है। ऐसे में एक पक्षकार दूसरे पक्षकार के चरित्र पर उंगली उठाता है, तब क्या कोई पक्षकार जिसके मान सम्मान को ठेस पहुंची है, दूसरे पक्ष के वकील या पक्षकार पर मानहानि का मामला दर्ज कर सकता है। जानते हैं इसका जबाब सरल शब्दों में।

दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1860 की धारा 499 (अपवाद क्रमांक 05) की परिभाषा

आपराधिक या सिविल मामले में न्यायालय द्वारा किसी निर्णीत प्रकरण की कार्यवाही के दौरान सद्भावना पूर्वक किसी व्यक्ति के चरित्र पर लांछन लगाना मानहानि का अपराध नहीं होगा लेकिन जानबूझकर कर गलत लांछन लगाना मानहानि का अपराध हो सकता है।

इसको हम सरल भाषा में उधारानुसार बताते हैं:-
'क, जो एक वकील हैं और 'ख, के बारे में यह कहता है कि शायद 'ख, का चरित्र सही नहीं है, वह ऐसा अपराध कर सकता है तब क द्वारा ऐसा कहना मानहानि का अपराध नहीं होगा।
लेकिन 'क, जानबूझकर कर असत्य कथन बोलता है कि 'ख, एक बदचलन व्यक्ति है एवं उसने ही यही अपराध किया गया तब ऐसा लांछन मानहानि का अपराध होगा।

अर्थात न्यायिक कार्यवाही के दौरान सदभावना पूर्वक अनजाने में लगाया गया लांछन इस धारा के अंतर्गत अपराध नहीं होगा। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665

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