सो रहे इंसान का दिमाग खतरे को कैसे पहचान लेता है- GK in Hindi

Bhopal Samachar
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आपने भी कई बार महसूस किया होगा। कोई व्यक्ति आपके पीछे खड़ा है। आप उसे देख नहीं पा रहे हैं लेकिन वह आप को घूर रहा है, तो आपको इसका एहसास हो जाता है। कई कहानियों में आपने पढ़ा होगा, रात्रि में विश्राम कर रहे राजा पर जैसे ही हमला होने वाला होता है, राजा की नींद खुल जाती है। सवाल यह है कि क्या राजा की कहानियों में दर्ज यह प्रसंग सही होता है। इंसान का दिमाग खतरे को कैसे पहचान लेता है। जबकि खतरा आंखों के सामने नहीं होता। 

साइकोलॉजी के अनुसार राजा की कहानियों में जो प्रसंग दिए गए हैं, वह न केवल संभव है बल्कि एक सामान्य प्रक्रिया है। मनुष्य के पास एक अद्भुत शक्ति होती है जिसे Subconcious Mind (अवचेतन मन) नाम दिया गया है। यह कई बार हमारे दिमाग से ज्यादा तेज काम करता है। जब कोई घूर कर देखता है, तो इसकी इंफॉर्मेशन सबकॉन्शियस माइंड, ब्रेन तक पहुंचा देता है। 

रात के समय जब कोई मनुष्य सो रहा होता है। तब उसका शरीर एवं दिमाग विश्राम कर रहा होता है परंतु सबकॉन्शियस माइंड पूरी मुस्तैदी के साथ काम कर रहा होता है। एक प्रकार से सबकॉन्शियस माइंड चौकीदारी कर रहा होता है। जैसे ही कोई खतरा आता है वह तत्काल ब्रेन को सिग्नल देता है और तत्काल आपकी नींद खुल जाती है।

यह संभव हो सकता है कि सबकॉन्शियस माइंड किसी सामान्य गतिविधि को खतरा मानकर आपके ब्रेन में अलर्ट भेज दे लेकिन यह संभव नहीं हो सकता कि सबकॉन्शियस माइंड किसी भी खतरे को पहचानने से चूक जाए या फिर ब्रेन तक अलर्ट भेजने से चूक जाए।
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