MP Panchayat Chunav news- ओबीसी आरक्षण मिलेगा या नहीं, पढ़िए विशेषज्ञों के विचार

भोपाल।
मध्य प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण को खत्म कर दिया है। कमलनाथ सरकार ने 27% और शिवराज सिंह सरकार ने 35% आरक्षण देने का प्रयास किया था। अब पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा रही है। लोग जानना चाहते हैं कि क्या पुनर्विचार याचिका से ओबीसी आरक्षण मिल जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि 99% पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाती हैं। आइए समझते हैं मध्य प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण की कितनी संभावना है।

संविधान में OBC को आरक्षण का जिक्र ही नहीं है

मनीष दीक्षित बताते हैं कि संविधान के 73वें और 74वें संशोधन 1992 के हैं। पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त करने से जुड़ा संविधान संशोधन एलएम सिंघवी समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार किया गया माना जाता है। त्रिस्तरीय पंचायत की परिकल्पना उनकी रिपोर्ट से ही निकली है। संविधान के 73वें एवं 74 वें संशोधन के मुख्य प्रावधानों में ओबीसी को आरक्षण देने का जिक्र नहीं है, बल्कि अनुसूचित जाति और जनजाति को ही आरक्षण का उल्लेख है, वह भी जनसंख्या के हिसाब से।

राज्यों ने वोट बैंक के लिए OBC आरक्षण दिया 

अनुच्छेद 243 के अधीन राज्य विस को पंचायतों की संरचना के प्रावधान की शक्ति दी गई है। राज्यों ने कानून बनाए और राजनीतिक लाभ-हानि के हिसाब से आरक्षण को भी शामिल कर लिया। मप्र में पंचायती राज व्यवस्था के लिए 1993 में कानून बनाया गया। मूल अधिनियम में ओबीसी को आरक्षण का प्रावधान नहीं था। सन 1994 में सरकार ने पहली बार मध्य प्रदेश में 14% ओबीसी आरक्षण निर्धारित किया और कमलनाथ सरकार ने 2019 में इसे बढ़ाकर 27% कर दिया। इसी कारण विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। 

OBC आरक्षण का अस्तित्व तभी तक जब तक विवाद ना हो 

एडवोकेट अजय गौतम का कहना है कि इस प्रकार के आरक्षण का स्थित हो तभी तक रहता है जब तक कि कोई विवाद ना हो। जब सरकार ने 14% ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किया था, तब जनता में जागरूकता की कमी थी। जब कमलनाथ सरकार ने 27% आरक्षण का प्रावधान किया तब जनता जागरूक थी। इसलिए विवाद उपस्थित हुआ। इसी कारण 14% श्री कार्य आरक्षण भी खतरे में आ गया है। मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया MP NEWS पर क्लिक करें.