इंदौर का सबसे प्राचीन शिव मंदिर, जिसके कारण साढे चार हजार साल से अकाल नहीं पड़ा- INDORE OLDEST SHIV TEMPLE

इंदौर
। वैसे तो इंदौर को देवी अहिल्या की नगरी कहा जाता है परंतु वास्तव में यह शहर इंद्रेश्वर महादेव का शहर है। कहते हैं कि देवी अहिल्या की सफलताओं के पीछे भी इंद्रेश्वर महादेव का आशीर्वाद था। इसीलिए देवी अहिल्या के चित्र में उनके हाथ में शिवलिंग दिखाया जाता है। मान्यता है कि इंद्रेश्वर महादेव ने इस क्षेत्र को इंदौर बनाने के लिए देवी अहिल्या का चयन किया था। कहते हैं कि इंद्रेश्वर महादेव के कारण इंदौर शहर में पिछले साढे चार साल से अकाल नहीं पड़ा।

इंदौर के इंद्रेश्वर महादेव की कथा - INDRESHVARA MAHADEV INDORE STORY

साढे चार हजार वर्ष पूर्व त्वष्टा प्रजापति के धर्म परायण पुत्र कुषध्वज का देवराज इंद्र के हाथों वध हो गया था। इससे क्रोधित होकर त्वष्टा प्रजापति ने अपनी जटाओं के एक बाल को अग्नि में समर्पित करके वृत्रासुर नामक दैत्य का आह्वान किया। त्वष्टा प्रजापति की आज्ञा से वृत्रासुर नामक दैत्य ने देवताओं को युद्ध में पराजित करके राजा इंद्र को बंधक बना लिया एवं स्वर्ग पर अधिकार कर लिया। त्वष्टा प्रजापति का क्रोध शांत होने के बाद देव गुरु बृहस्पति ने उनसे परामर्श किया, और देवराज इंद्र को मुक्त कराया। 

स्वर्ग को वृत्रासुर नामक दैत्य से मुक्त कराने के लिए देव गुरु बृहस्पति ने इंद्र को बताया कि पृथ्वी पर, महाकाल वन में स्थित खंडेश्वर महादेव के दर्शन एक शिवलिंग स्थित है। जो पृथ्वीवासियों को ज्ञात नहीं है। उस शिवलिंग का विधिपूर्वक अभिषेक एवं अनुष्ठान करने पर आपको अपने स्वर्ग का राज्य फिर से प्राप्त हो सकता है। देव गुरु बृहस्पति के कथन के अनुसार देवराज इंद्र ने विधि पूर्वक शिवलिंग का अभिषेक एवं अनुष्ठान किया। इससे भगवान शिव प्रसन्न हुए और उन्होंने वृत्रासुर नामक दैत्य का वध करके स्वर्ग में देवराज इंद्र का शासन स्थापित किया। देवराज इंद्र के द्वारा प्रथम पूज्य इस शिवलिंग को इंद्र के ईश्वर अर्थात इंद्रेश्वर महादेव नाम दिया गया। (कथा लेखक-उपदेश अवस्थी)

इंद्रेश्वर महादेव के चमत्कार 

कहते हैं कि इंदौर का अस्तित्व इंद्रेश्वर की इच्छा से ही बना हुआ है। प्राचीन काल से लेकर वर्तमान तक इंदौर को जितने भी सफलताएं मिली उन सब के पीछे इंद्रेश्वर महादेव का विधान है। शिव भक्त कन्या अहिल्या को इंदौर में स्थापित करना भी इंद्रेश्वर महादेव की योजना थी। कहते हैं कि तब से लेकर अब तक इंदौर में कभी अकाल नहीं पड़ा। यदि कभी वर्षा कम होती है तो इंद्रेश्वर महादेव काजल अभिषेक किया जाता है एवं के गर्भ ग्रह को जल से भर दिया जाता है। ऐसा करने से भगवान इंद्र को संकेत मिलता है और इंदौर में वर्षा होती है। 

यह भी कहा जाता है कि इंदौर के प्राकृतिक जल स्रोतों में यदि कोई सूख जाता है तो उसमें इंद्रेश्वर महादेव के अभिषेक का जल अर्पित कर देने से वह जल स्रोत पुनर्जीवित हो जाता है। इंदौर शहर में तो लोग अपने ट्यूबवेल में भी उत्खनन के समय इंद्रेश्वर महादेव का अभिषेक किया हुआ जल डालते हैं। 

इंद्रेश्वर महादेव भक्तों का चमत्कारी अनुभव है कि उन्हें कभी सफेद दाग की बीमारी नहीं होती। यदि किसी को थी तो जैसे ही उसने इंद्रेश्वर महादेव के दर्शन किए, उसके सफेद दाग खत्म चले गए। 

इंद्रेश्वर महादेव इंदौर शहर में रेलवे स्टेशन से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर पंढरीनाथ थाने के पीछे स्थित है। इंदौर की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया indore news पर क्लिक करें.