उत्तराधिकारी को भूमि संपत्ति प्राप्त करने क्या कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए, जानिए - MP Land Revenue Code, 1959

कई बार विधिवत वसीयतनामा नहीं होता परंतु प्रत्येक व्यक्ति को अपने पूर्वजों की संपत्ति में उत्तराधिकार का अधिकार प्राप्त होता है। पिता की संपत्ति में सभी संतानों को उत्तराधिकार प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कि ऐसी स्थिति में जबकि वसीयत या अन्य कोई दस्तावेज ना हो, तब पूर्वजों की संपत्ति पर अधिकार प्राप्त करने के लिए मध्यप्रदेश में एक नागरिक को क्या कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए। 

मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता, 1959 की धारा 109 की परिभाषा:-

• कोई भी व्यक्ति जो भूमि में अपना अधिकार रखता है वह अपना अधिकार प्राप्त करने के लिए अधिकार प्राप्त की तारीख से छः माह के 1. भीतर ग्रामीण क्षेत्र में भूमि प्राप्त करने की दशा में पटवारी या भू राजस्व अधिकारी तहसीलदार को रिपोर्ट भेजेगा। 2. अगर व्यक्ति नगरीय क्षेत्र में भूमि पर अधिकार प्राप्त करना चाहता है तब नगर सर्वेक्षण या तहसीलदार को रिपोर्ट करेगा। अगर कोई भूमि अधिकार प्राप्त करने वाला व्यक्ति अवयस्क हो तब उसके संरक्षक या उसकी सहमति से अन्य भारसाधक व्यक्ति द्वारा रिपोर्ट दी जाएगी। 

• अगर भूमि किसी भारतीय रजिस्ट्रीकरण अधिनियम, 1908 के अधीन रजिस्ट्रीकृत हो गई है तब रजिस्ट्रीकरण अधिकारी उस क्षेत्र पर जहां भूमि स्थित हैं तहसीलदार को सम्पूर्ण जानकारी भेजेगा जैसी वह सूचना द्वारा मांगेगा।

• ऐसा व्यक्ति जिसने भूमि पर वर्तमान में अधिकार किया है या कोई व्यक्ति ऐसी भूमि का अधिकार प्राप्त करना चाहता है, वह दस्तावेज जो उसके पास अधिकार संबंधित रखता है, उनको पटवारी, नगर सर्वेक्षक, राजस्व निरीक्षक या राजस्व अधिकारी को मांगने पर प्रस्तुत करेगा।

• अगर कोई व्यक्ति उपर्युक्त अधिकारी अधिकार संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं करता है तब तहसीलदार पाँच हजार रुपए तक का जुर्माना उस पर लगा सकता है।

महत्वपूर्ण जजमेंट:- प्रमोद कुमार गोयल बनाम मध्यप्रदेश राज्य, 2016

उक्त मामले में न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया कि नगर पालिका की भूमि का बिना उसे संयोजन (मिलाव) किए निजी व्यक्ति के नाम से ट्रांसफर किया गया है। ऐसा आदेश नगर पालिका पर बन्धकारक नहीं होगा। किसी भूमि के स्वामी के मालिकाना हक या कब्जा को किसी निजी व्यक्ति को अभिनिर्णीत करने का तहसीलदार को अधिकार नहीं हैं।

2. रघुवर कुशवाह एवं अन्य बनाम चंद्रमणि कुशवाहा एवं अन्य, 2018

उक्त मामले में न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि पुत्र एवं पुत्रियों को हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत उनकी पैतृक संपत्ति में समान अधिकार प्राप्त है। ऐसी सम्पति प्राप्त के दावे में पुनः निरीक्षण अवश्य नहीं होता है।
नोट:- विधवा पत्नी को पति की भूमि संबंधित संपत्ति प्राप्त करने का अधिकार प्राप्त होता है। (Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article)

:- लेखक बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665
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