शिवलिंग का दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से अभिषेक करने पर क्या फल मिलता है, पढ़िए - INDIA के तीज त्यौहार और पूजा विधि

शास्त्रों का अध्ययन और साइंस के लॉजिक जाने बिना बिना कुतर्क करने वाले हजारों लोगों के तमाम बड़े अभियानों के बावजूद भारतवर्ष में विधि विधान के अनुसार शिवलिंग के अभिषेक की परंपरा बढ़ती जा रही है। जबलपुर के दो प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित सौरभ दुबे एवं पंडित प्रवीण मोहन शर्मा ने बताया कि शिवलिंग का विभिन्न पदार्थों से अभिषेक क्यों किया जाता है और किस पदार्थ से अभिषेक करने पर क्या फल प्राप्त होता है। 

शिवलिंग का दूध से अभिषेक करने पर क्या लाभ होता है, पढ़िए

दूध धर्म के और मन पर प्रभाव के दृष्टिकोण से सात्विक समझा जाता है। इसमें भी गाय का दूध सर्वाधिक पवित्र और अच्छा माना जाता है। शिवजी के रुद्राभिषेक में दूध का विशेष उपयोग होता है। शिवलिंग का दूध से रुद्राभिषेक करने पर समस्त मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। सोमवार के दिन दूध का दान करने से चंद्रमा मजबूत होता है। जल में थोड़ा सा दूध डालकर स्नान करने से मानसिक तनाव दूर होता है और चिंताएं कम होती हैं। 

शिवलिंग का दही से अभिषेक करने पर क्या फल प्राप्त होता है, पढ़िए

ऐसी मान्यता है कि दही से अभिषेक करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। दही से रुद्राभिषेक करने से भवन-वाहन की भी प्राप्ति होती है।

शिवलिंग के अभिषेक में शहद को शामिल क्यों किया जाना चाहिए

शहद से अभिषेक करने से धन वृद्धि होती है। इसके साथ ही शहद से अभिषेक करने से पुरानी बीमारियां भी नष्ट हो जाती हैं। 

शिवलिंग का अभिषेक में घी का प्रयोग क्यों करते हैं

घी से अभिषेक करने पर भी धन में वृद्धि और आरोग्यता लाता है।

शिवलिंग के अभिषेक की सामग्री में शक्कर क्यों मिलाते हैं

शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से इंसान विद्वान हो जाता है। 

शिवलिंग के अभिषेक में इत्र, गन्ने का रस और सरसों के तेल से क्या होता है

अगर आप शादीशुदा जीवन से खुश नहीं हैं तो भगवान शिव का इत्र से अभिषेक करें। ऐसा करने से आपके अपने पति के साथ संबंध मधुर बनेंगे।
शिवलिंग पर गन्ने के रस से अभिषेक करने पर अपार लक्ष्मी मिलती है।
शत्रुओं से परेशान हैं तो सरसों के तेल से शिवलिंग पर अभिषेक करने से दुश्मन पराजित होंगे।

शिवलिंग के अभिषेक में बिल्वपत्र और भांग का महत्व क्या है

बेलपत्र को संस्कृत में 'बिल्वपत्र' कहा जाता है। यह भगवान शिव को बहुत ही प्रिय है। ऐसी मान्यता है कि बेलपत्र और जल से भगवान शंकर का मस्तिष्क शीतल रहता है। पूजा में इनका उपयोग करने से वे बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं।

हलाहल विष के सेवन के बाद शिवजी का शरीर नीला पड़कर तपने लगा परंतु फिर भी शिव पूर्णतः शांत थे लेकिन देवताओं और अश्विनी कुमारों ने सेवा भावना से भगवान शिव की तपन को शांत करने के लिए उन्हें जल चढ़ाया और विष का प्रभाव कम करने के लिए विजया (भांग का पौधा), बेलपत्र और धतूरे को दूध में मिलाकर भगवान शिव को औषधि रूप में पिलाया। तभी से लोग भगवान शिव को भांग भी चढ़ाने लगे। भारत की महत्वपूर्ण खबरों के लिए कृपया INDIA NATIONAL NEWS पर क्लिक करें.