GWALIOR NEWS- महाराज की हस्ती मिटाने, कमलनाथ को चंबल में बफादारों की तलाश

ग्वालियर
। ज्योतिरादित्य सिंधिया के कारण मात्र 15 महीने में पूर्व मुख्यमंत्री हो गए कमलनाथ अब चंबल संभाग में बफादारों की तलाश कर रहे हैं ताकि ग्वालियर के महाराज की राजनीतिक हस्ती मिटाई जा सके। इसीलिए कमलनाथ चंबल के सबसे जिद्दी शहर भिंड में आ रहे हैं। दिनांक 23 फरवरी को भिंड में सिंधिया विरोधियों का वॉक इन इंटरव्यू होगा। सिलेक्ट हुए कैंडीडेट्स को राउंड टेबल मीटिंग के लिए भोपाल बुलाया जाएगा। 

कमलनाथ के कॉन्फिडेंस का कारण क्या है- POINT 2 POINT

- ग्वालियर चंबल संभाग भारतीय जनता पार्टी का गढ़ है। 
- 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 34 में से 20 सीटें मिली थीं। 
- 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा 7 सीटों पर सिमट गई। 
- 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 26 सीटों पर विजय प्राप्त हुई। 
- माना गया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव के कारण यह सफलता मिली है। 
- 2019 के लोकसभा चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया, चुनाव हार गए। 
- प्रश्न उपस्थित हुआ, यदि ज्योतिरादित्य सिंधिया के कारण कांग्रेस पार्टी को 34 में से 26 सीटें मिली थीं तो फिर ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव क्यों हार गए। 
- निष्कर्ष निकाला गया कि जनता का मूड बदल गया है। वह ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी के साथ है। 

कमलनाथ और कांग्रेस उपचुनाव क्यों हार गए

- सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ग्वालियर चंबल की जनता कांग्रेस पार्टी के साथ है तो फिर उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी हार क्यों गए। 
- निष्कर्ष निकाला गया कि चुनाव का सारा मैनेजमेंट बाहरी नेताओं को दे दिया गया था। 
- ग्वालियर चंबल के लोग बाहरी नेताओं के कंट्रोल में चुनाव लड़ना पसंद नहीं करते। 
- इसलिए कमलनाथ इस बार ग्वालियर चंबल में ही कांग्रेस पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं की तलाश कर रहे हैं।
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