MP CORONA NEWS- 19 साल के लड़के की मौत जबकि मंत्री जी 24 घंटे में स्वस्थ

भोपाल
। कोरोनावायरस भले ही भेदभाव ना करता हो परंतु मध्य प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था करती है। छिंदवाड़ा में 19 साल की लड़के की मौत हो गई। जबकि गाइडलाइन के विरुद्ध मंत्री कमल पटेल, हरदा कलेक्टर द्वारा 24 घंटे में स्वस्थ घोषित कर दिए गए। वह लड़का नेगेटिव था लेकिन उसे कोविड ICU में भर्ती किया गया। मंत्री जी की रिपोर्ट पॉजिटिव थी, डॉक्टरों ने पता नहीं कौन सी जादुई दवाई दी, 24 घंटे के भीतर उनकी रिपोर्ट नेगेटिव हो गई।

पॉजिटिव नहीं था फिर भी कोविड ICU में भर्ती कर दिया, लड़के की मौत

19 साल के नीलेश इनवाती को छिंदवाड़ा के अस्पताल में 13 जनवरी की रात में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों का कहना है कि उसका ऑक्सीजन लेवल कम था। उसकी कोविड-19 जांच रिपोर्ट नहीं आई थी परंतु  कोविड केयर के ICU वार्ड में भर्ती किया गया था। 24 घंटे के भीतर उसकी मृत्यु हो गई। लड़के की मौत के बाद RTPCR रिपोर्ट नेगेटिव आई। कोविड केयर प्रभारी डॉक्टर भूपेश जैन का कहना है कि मौत की वजह बैक्टीरियल निमोनिया है। 

मंत्री कमल पटेल 24 घंटे में स्वस्थ हो गए 

मध्य प्रदेश शासन के मंत्री, किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग कमल पटेल का कोरोनावायरस सुर्खियों में आ गया है। 1 दिन पहले उन्होंने ट्वीट करके बताया था कि उनकी RTPCR पॉजिटिव आई है, मेरे संपर्क में आए सभी लोग अपना टेस्ट करवा ले। दूसरे दिन हरदा कलेक्टर की तरफ से घोषित किया गया कि मंत्री कमल पटेल पूरी तरह से स्वस्थ हैं। उनकी नेगेटिव रिपोर्ट कलेक्टर द्वारा जारी की गई। 

मंत्री जी की सुपर फास्ट रिकवरी का राज क्या है

पब्लिक के सरल सवाल यह है कि यदि कोई लक्षण ही नहीं थे तो फिर जांच क्यों करवाई। 
गाइड लाइन के अनुसार पॉजिटिव मरीज को 7 दिन तक दूसरी जांच कराने की अनुमति नहीं है। मंत्री कमल पटेल को यह सुविधा क्यों दी गई। 
हरदा कलेक्टर ने मंत्री कमल पटेल को नेगेटिव घोषित करने के लिए इतने प्रयास क्यों किए। 
गाइडलाइन के अनुसार सिर्फ 7 दिन होम आइसोलेशन में रहना था। वह क्या कारण था जो गाइडलाइन और प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर दिया गया। 
यदि पहली रिपोर्ट गलत थी तो सैंपल की जांच करने वाले डॉक्टर के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। 
क्या सिर्फ कमल पटेल की जांच रिपोर्ट गलत थी या पूरे हरदा की रिपोर्ट गलत आई है। 
क्या हरदा के सभी संक्रमित नागरिकों का दोबारा टेस्ट होगा। 
यह कैसे विश्वास किया जा सकता है कि दूसरी रिपोर्ट सही है जबकि पहली गलत थी।
जनता, पत्रकार और भाजपा के कार्यकर्ता भी जानना चाहते हैं मंत्री जी की सुपर फास्ट रिकवरी का राज क्या है। 
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