थॉट मैनेजमेंट- जब भूत और भविष्य की चिंता बने जीवन की रूकावट - MOTIVATIONAL ARTICLE IN HINDI

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शक्ति रावत।
भविष्य की चिंता करना उस उधार को चुकाने की तरह है, जो आपने कभी लिया ही नहीं। प्रसिद्व लेखक और विचारक मार्क ट्वेंन का यह कथन अपने आप में बहुत कुछ कहता है। इसी तरह बीते हुए का पछतावा बचपन के उस जूते को फिर पैर में डालने की कोशिश जैसा है, जो कि अब किसी भी हालत में आपके पैर में वापस जा नहीं सकता। अकसर लोगों की जिंदगी में भूतकाल का पछतावा और आने वाले कल यानि भविष्य की चिंता उनके आगे बढऩे में रूकावट बन जाती है। अगर कहीं आपके साथ भी एेसा हो रहा है, तो थॉट मैनेजमेंट का यह चैप्टर आपके काम का है।

1- जो बीत गया सो बीत गया

ज्यादातर लोग भूतकाल में की गई अपनी भूलों और गलतियों के पछतावे से परेशान रहते हैं। जबकि वे अच्छी तरह से जानते हैं, कि उस समय में दोबारा लौटकर उन्हें सुधारा नहीं जा सक ता। उनकी यह चिंता उनके वर्तमान और आने वाले कल को खराब करती है। तब उपाय यह है कि बीते हुए को स्वीकार कर लीजिये, जो हो गया सो हो गया। इससे यह बार-बार आपको परेशान करना बंद कर देगा। वैसे अपने अतीत को देखने का सबसे अच्छा नजरिया यह है कि आप सोचें की पिछले समय की तुलना में अब आप कितने आगे आ गए हैं। अतीत आपकी यादों के सिवा अब कहीं भी नहीं है, वह बीत चुका है।

2- जो आया नहीं, उसकी क्या चिंता

लोग अतीत से निकलते हैं, तो भविष्य की चिंता में उलझ जाते हैं। तो पहली बात यह है कि भविष्य हमेशा अनिश्चत है, ऐसे में खुद से बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाना या बिल्कुल नाउम्मीद हो जाना दोनों बातें ठीक नहीं हैं। अतीत की तरह भविष्य की चिंता भी आपके दिमाग की उपज है। जरूरत से ज्यादा सोचेंगे तो यह आपकी तरक्की में बाधा बन जाएगा। अतीत की तरह ही भविष्य को देखने का सबसे अच्छा तरीका यह है, कि सकारात्मक होकर सिर्फ यह सोचें कि आने वाले 5 साल के बाद मैं खुद को कहां देखना चाहूंगा, लेकिन इसकी ज्यादा चिंता लेने की जरूरत नहीं है, सिर्फ कोशिश करना आपका काम है, उसी पर आपका वश है।

3- दोनों चिंताओं का एक ही हल वर्तमान

अतीत को लेकर आप कितना भी मलाल कर लें, उसे बदल नहीं सकते और भविष्य को लेकर चाहे जितनी चिंता कर लें उससे कुछ हासिल नहीं कर सकते। इसलिये सबसे बेहतर उपाय है, वर्तमान में रहना। दोनों को एक सीमा तक सोचिये उससे ज्यादा नहीं। वर्तमान पर फोकस कीजिये क्योंकि यही आपके हाथ में है। जो आज है असल में वही जीवन है, ना बीता हुआ कल और ना ही आने वाला कल। -लेखक मोटीवेशनल एंव लाइफ मैनेजमेंट स्पीकर हैं। 
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