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CORONA की दूसरी लहर के बीच जूनियर डॉक्टर ने सरकार को धमकाया - MP NEWS

भोपाल
। मध्यप्रदेश में कोरोनावायरस की दूसरी लहर के बीच जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने सरकार को धमकाना शुरू कर दिया है। चेतावनी दी है कि यदि उनकी बात नहीं मानी गई तो वह अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

पिछली बार हमने सरकार से कोई डिमांड नहीं की थी: जूडा प्रेसिडेंट, भोपाल

भोपाल जूडा प्रेसीडेंट डॉ. अरविंद मीणा ने कहा कि कोरोना संक्रमण काल का एक साल पूरा हो गया है, इस बीच उन्होंने अपनी जान को जोखिम में डालकर मरीजों की सेवा की और दिन-रात एक करते हुए लगातार काम किया। इस बीच तमाम संसाधनों के अभाव में होने के बावजूद भी सरकार और प्रशासन से कोई डिमांड नहीं की, लेकिन अब एक बार फिर से इस वायरस ने अपना पैर पसारना शुरू कर दिया है। 

जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार के सामने यह मांगे रखी

ऐसे में सरकार से जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन मप्र मांग करता है कि कोविड वार्ड्स में डॉक्टरों की वैकल्पिक व्यवस्था कर अति गंभीर मरीजों को ही हमीदिया भेजा जाए। इसके साथ ही कोरोना वॉरियर्स को दिए जाने वाले भत्ते को मय एरियर के साथ भुगतान किया जाए और जूडा द्वारा एक साल तक सतत किए गए इस काम को देखते हुए 10 नंबर का प्रशस्ति पत्र सरकार की ओर से मिले, जो भविष्य में मेडिकल कॉलेज में आवेदन करते वक्त काम आ सके। इन तमाम मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर्स ने शुक्रवार को गांधी मेडिकल कॉलेज के हमीदिया अस्पताल परिसर में पत्रकारों से चर्चा कर कही। 

हमें कोरोना के काम से मुक्त किया जाए: जूनियर डॉक्टर्स की मांग

कोरोना के गंभीर मरीजों को ही मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में करें भर्ती 

कोरोनाकाल की वजह से एक साल से हमारे अध्ययन में अवरोध हो रहा है, क्योंकि पहले संसाधनों का अभाव था और तुरंत डॉक्टर उपलब्ध न हो पाने के कारण जूनियर डॉक्टर्स ने अपनी सेवाएं प्रदान की परन्तु प्रशासन ने संसाधन उपलब्ध नहीं करवाए। ऐसे में जूनियर डॉक्टर मांग करता है कि हमें कोरोना कार्य से मुक्त किया जाए, केवल अति गंभीर कोरोना प्रभावित मरीज ही चिकित्सा महाविद्यालय से जुडे अस्पताल में भर्ती किए जाएं। अन्य मरीजों को अन्य सरकारी अस्पतालों में शिफ्ट किया जाए एवं कोविड कार्य के लिए अलग से अतिरिक्त डॉक्टरों तथा अन्य कर्मचारियों की भर्ती की जाए। 

जूनियर डॉक्टर्स की ट्यूशन फीस माफ करो

कोविड के दौरान जूडा जो एक वर्ष से जो जन सेवा कर रहा है, उससे जिस मानसिक तनाव, अकेलापन, घर और परिजनों से दूर रहकर मजबूरीवश और स्वयं अपने स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए होने वाले खर्च का वहन स्वयं कर काम कर रहा है। इन सभी समस्याओं को देखते हुए विगत वर्ष का शिक्षण शुल्क मुक्त किया जाए। क्योंकि कोरोना में ड्यूटी करना स्वयं ही शासन को सेवा देने के बराबर है। इसलिए जूनियर डॉक्टर को ग्रामीण सेवा के बंधन से मुक्त किया जाए। मेडिकल विश्वविद्यालय बनने के बाद अनावश्यक रूप से विभिन्न शुल्क में वृद्धि की गई है ऐसे में शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त शुल्क का सही से निर्धारण किया जाए और पूर्व यूनिवर्सिटी द्वारा लिए जा रहे शुल्क के बराबर ही शुल्क लिया जाए।

जूनियर डॉक्टर्स को मानदेय में हर साल 6% इंक्रीमेंट दिया जाए

पूर्व में (2018) में प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा हर साल मानदेय में 6 प्रतिशत वृद्धि का वचन दिया गया था लेकिन उसे आज तक पूरा नहीं किया गया है और इन बीतें दो सालों में जिस तरह से महंगाई में वृद्धि हुई है इसको ध्यान में रखते हुए 3 साल के एरियर के साथ 18 प्रतिशत (तीन वर्ष का वृद्धि के आदेश दिए जाएं) एवं इंटर्नशिप कर रहे एमबीबीएस छात्रों के मानदेय में समान रूप से 18 प्रतिशत की वृद्धि की जाए क्योंकि उन्होंने भी कोरोना में अपना अहम योदान दिया है। 

कोरोना वॉरियर्स को 10 हजार प्रतिमाह भत्ता देना शुरू करें

जूडा प्रेसीडेंट डॉ. मीणा ने बताया कि करीब एक साल पहले कोरोना संक्रमण काल के दौरान सीएम शिविराज सिंह चौहान द्वारा कोरोना के खतरे, कार्य करने में कठिनाई, सेनिटाइजर, वाहन और भोजन व्यवस्था पर किए गए खर्च को देखते हुए वचन दिया गया था कि सभी कोरोना वॉरियर्स को 10 हजार रुपए प्रति माह दिया जाएगा। जो कि अभी तक नहीं दिया गया है, उसको यथावत उसी समय से एरियर के साथ प्रदान किया जाए। 

जूनियर डॉक्टरों को 10 नंबर का प्रशस्ति पत्र दिया जाए

जूडा ने अपनी पांच और अंतिम मांग में सरकार से एक गुजारिश की है। उनका कहना है कि कोरोना काल में जिस सच्चे भाव और अपना संपूर्ण जीवन दांव पर लगाकर जूडा जो एक साल से लगातार काम कर रहा है, उसे सम्मान देते हुए एक 10 नंबर प्रशस्ति पत्र दिया जाए जो कि उनके भविष्य में जब भी किसी सरकारी विभाग तथा सरकार द्वारा मान्यता प्रापत संस्थान में सेवा के लिए आवेदन करें तो मान्य हो, इसको राजपत्र के माध्यम से प्रकाशित किया जाए। 


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