दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के रास्ते अलग, 40 साल की दोस्ती में दरार - MP CONGRESS NEWS

Bhopal Samachar
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भोपाल
। मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के रास्ते अलग-अलग हो गए हैं। दिग्विजय सिंह इन दिनों जिन किसान पंचायतों को आयोजित और संबोधित कर रहे हैं, कमलनाथ इसके लिए स्पष्ट रूप से मना कर चुके हैं। कमलनाथ के इनकार के बाद भी दिग्विजय सिंह कि किसान पंचायत है इस बात का खुला ऐलान है कि दोनों के रास्ते अलग-अलग हो गए हैं। दोनों अनुभवी एवं उम्र दराज है इसलिए सार्वजनिक मंच पर एक साथ दिखाई दे सकते हैं परंतु 40 साल की दोस्ती में दरार पड़ चुकी है। 

दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ के लिए की थी किसान पंचायतों की प्लानिंग

दरअसल, दिग्विजय सिंह ने मध्य प्रदेश में किसान पंचायतों की तैयारी कमलनाथ के लिए की थी। दिग्विजय सिंह को पूरा विश्वास है कि किसानों के रास्ते कांग्रेस पार्टी एक बार फिर सत्ता में आ सकती है। किसान आंदोलन के दौरान अवसर का लाभ उठाने के लिए और कमलनाथ को किसानों का नेता बनाने के लिए दिग्विजय सिंह ने किसान पंचायतों की प्लानिंग की थी। 

कमलनाथ ने पूरा कार्यक्रम बनवाया और फिर रिजेक्ट कर दिया

सूत्रों का कहना है कि इस बारे में दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बीच बातचीत हो गई थी। कमलनाथ सहमत थे और उन्होंने दिग्विजय सिंह से किसानों का पूरा कार्यक्रम बनाने के लिए कहा था। दिग्विजय सिंह ने जब किसान पंचायतों का पूरा कार्यक्रम बनाकर औपचारिक स्वीकृति के लिए कमलनाथ के पास भेजा तो उन्होंने दिग्विजय सिंह को विश्वास में लिए बिना रिजेक्ट कर दिया। 

किसी भी स्थिति में किसान पंचायतों के लिए कमलनाथ तैयार नहीं हुए

दिग्विजय सिंह ने उन्हें सलाह दी कि कमलनाथ के नाम पर किसान पंचायतों का आयोजन किया जाएगा परंतु सभी जिलों में कमलनाथ को जाना नहीं पड़ेगा। वह खुद एवं क्षेत्रीय नेता किसान पंचायत का संचालन करेंगे कमलनाथ इसके लिए भी राजी नहीं हुए। दिग्विजय सिंह ने यहां तक कोशिश की कि कांग्रेस के बैनर तले किसी भी तरीके से और किसी भी स्तर पर किसान पंचायतों का आयोजन हो जाए लेकिन कमलनाथ ने इंकार कर दिया। 

कमलनाथ बड़े भाई हैं, बॉस नहीं है 

सूत्रों का कहना है कि दिग्विजय सिंह अपने स्तर पर पूरी तैयारी कर चुके थे और फिर कमलनाथ का इस तरह कार्यक्रम को रिजेक्ट करना उनके आत्मसम्मान को चोटिल कर गया। यही कारण है कि किसान पंचायत एक गैर राजनीतिक कार्यक्रम बन गया है। किसान पंचायतों के माध्यम से दिग्विजय सिंह ने कमलनाथ तक एक मैसेज लाउड एंड क्लियर पहुंचाने की कोशिश की है कि वह बड़े भाई हो सकते हैं बॉस नहीं।

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