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DNA से पौधों की गणना की जा सकती है, कृषि विश्वविद्यालय JABALPUR के अविष्कार को पेटेंट मिला - Botany news

जबलपुर
। जबलपुर कृषि विश्वविद्यालय ने "डीएनए बारकोड फॉर स्पीशीज आईडेंटिफिकेशन ऑफ सेज प्लांट एंड मेथडस ऑफ देयर" नाम की एक ऐसी तकनीक खोज निकाली है जिसे भारत सरकार द्वारा पेटेंट के रूप में मंजूरी प्रदान कर दी गई है।  इसका फायदा यह होगा कि कई जानलेवा बीमारियों की दवाई बनाने के लिए औषधीय पौधों की उपलब्धता का पता चल जाएगा। वैज्ञानिक ऐसे कई काम करते हैं जो आम आदमी की जिंदगी को काफी सरल बना देते हैं, लोगों की जान बचाते हैं लेकिन दुख की बात यह है कि जनता केवल सड़कों और बड़े-बड़े फूलों का लोकार्पण करने वाले नेताओं को धन्यवाद देती है। 

DNA Barcode for Species Identification of Sage Plant and Methods of Their

इस तकनीक के माध्यम से अब किसी पौधे के विशिष्ट जीन से डीएनए के एक छोटे से खंड का उपयोग करके उस प्रजाति के सभी पौधों की गणना की जा सकती है। यह तकनीक विशेष रूप से औषधीय पौधों के लिए उपयोगी है।जानकारी के अनुसार विश्वविद्यालय द्वारा तैयार इस टेक्निक को भारत सरकार के सामने 16 जनवरी 2017 को फाइल किया गया था और तब से अब तक लगभग 3 वर्ष चली लंबी जांच प्रक्रिया के बाद इसे हाल ही में भारत सरकार के पेटेंट ऑफिस द्वारा अधिनियम 1970 के उपबंध के अनुसार 20 वर्ष की अवधि के लिए मान्यता प्रदान की गई है।

इस तकनीक को विश्वविद्यालय के जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के शोधकर्ता संचालक डॉ शरद तिवारी सहायक प्राध्यापक डॉ कीर्ति तंत्वाय एवं सह शोधार्थी डॉक्टर नीरज त्रिपाठी ने विकसित किया है। विश्वविद्यालय को प्राप्त होने वाला यह पहला पेटेंट है। इस उपलब्धि पर विश्व विद्यालय प्रबंधन ने वैज्ञानिक दल को बधाई दी है।

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