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महिला अधीक्षक की प्रताड़ना से तंग आकर रेप पीड़िता ने नींद की गोलियां खाई थी: मजिस्ट्रियल जांच का निष्कर्ष - BHOPAL NEWS

भोपाल
। प्यारे मियां मामले में दुष्कर्म पीड़ित लड़की की मौत के बाद एडीएम माया अवस्थी द्वारा की गई मिस्ट्रियल जांच की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है। बताया जा रहा है कि जांच का निष्कर्ष यह है कि बालिका गृह की महिला अधीक्षक की प्रताड़ना से तंग आकर दुष्कर्म पीड़ित लड़की ने अत्यधिक मात्रा में नींद की गोलियां खा ली थी। जिससे उसकी मृत्यु हो गई। अब यह पता लगाना बाकी है कि महिला अधीक्षक व्यक्तिगत कारणों से पीड़ित लड़की को प्रताड़ित करती थी या फिर उसका प्यारे मियां से भी कोई कनेक्शन है।

बालिका गृह की महिला अधीक्षक अंतोनिया कुजूर इक्का के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव

शहर के नेहरू नगर में स्थित बालिका गृह में विगत दिनों हुई एक नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की मौत के मामले में बिसरा रिपोर्ट आ गई है। इसमें पुष्टि हुई है कि नाबालिग की मौत नींद की गोलियां अधिक खाने से ही हुई थी। कलेक्टर अविनाश लवानिया ने इस रिपोर्ट के आधार पर बालिका गृह की तत्कालीन अधीक्षिका अंतोनिया कुजूर इक्का के खिलाफ विभागीय जांच का प्रस्ताव बनाकर संभागायुक्त को भेजा है। इधर, डायरेक्टर महिला एवं बाल विकास विभाग ने अधीक्षिका के खिलाफ आरोप पत्र भी जारी कर दिया है।

महिला अधीक्षक उसके साथ मारपीट करती थी: साथी लड़कियों का बयान 

बता दें कि घटना के बाद कलेक्टर ने एडीएम माया अवस्थी को मजिस्ट्रियल जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसके तहत बालिका के साथ रहने वाली अन्य बच्चियों सहित बालिका गृह के कर्मचारियों और मृत नाबालिग के परिजनों के बयान दर्ज किए गए थे। अन्य बच्चियों ने बयान में बताया है कि बालिका गृह की अधीक्षिका अंतोनिया कुजूर इक्का से रोजाना किसी न किसी बात पर विवाद होता था। कई बार तो हाथापाई की नौबत तक आ जाती थी। इसकी वजह से दुष्कर्म पीड़िता अवसाद में आ गई थी।

एडीएम ने मजिस्ट्रियल जांच में ये दिए सुझाव

- बच्चियों की नियमित काउंसिलिंग हो। इसके लिए स्थाई काउंसलर नियुक्त किया जाए।
- अधीक्षक या अन्य अधिकारी की निगरानी में ही बच्चियों को दवाई खिलवानी चाहिए।
- अधीक्षक का निवास परिसर में ही होना चाहिए।
- संप्रेषण गृह में रहने वाली बच्चियों का परिजनों से संपर्क कराते रहना चाहिए।
- बालिका गृह का स्वयं का इमरजेंसी वाहन होना चाहिए, ताकि वे बीमार बच्चियों को तत्काल अस्पताल ले जा सकें।
- बालिका गृह को डिस्पेंसरी या अस्पताल से जोड़ा जाना चाहिए, ताकि वहां के डॉक्टर तत्काल इलाज कर सकें और बच्चों से परिचित हो सकें।
- बालिका गृह की सुरक्षा व्यवस्था को और दुरुस्त किया जाना चाहिए।

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मजिस्ट्रियल जांच के आधार पर बालिका गृह की अधीक्षिका की लापरवाही सामने आई है। वर्तमान में वह निलंबित हैं। आगे विभागीय जांच कराने का प्रतिवेदन संभागायुक्‍त को भेजा गया है। -अविनाश लवानिया, कलेक्टर, भोपाल

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