चुनाव तो मैं ही लडूंगाः कांग्रेस विधायक, वो कोई तोप नहीं हैः शहर अध्यक्ष, नगरीय निकाय चुनाव, कांग्रेस में संघर्ष शुरू - MP NEWS

Bhopal Samachar
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उज्जैन
। नगर निगम चुनाव से पहले यहां दोनों कांग्रेस स्पष्ट रूप से उलझती हुई दिखाई दे रहीं हैं। संगठन की ओर से शहर कांग्रेस अध्यक्ष और कमलनाथ कांग्रेस की ओर से विधायक महेश परमार खुलकर आमने-सामने आ गए हैं।

चुनाव तो मैं सौ फीसदी लड़ूंगा: विधायक महेश परमार का दावा 

विधायक महेश परमार का कहना है कि ये कौन होते हैं नियम बनाने वाले। नियम तो कमलनाथ जी बनाएंगे। चुनाव तो सौ फीसदी मैं ही लड़ूंगा। अभिमन्यू की तरह कोई चक्रव्यूह को भेद सकता है तो वह मैं ही हूं। उन्होंने कहा कि समर्थन पत्र लाना कोई जरूरी नहीं है।

विधायक महेश परमार कोई तोप नहीं हैं: अध्यक्ष महेश सोनी 

अध्यक्ष महेश सोनी ने कहा कि विधायक महेश परमार कोई तोप नहीं हैं। कोई ये सोचे कि ऊपर से हवाई जहाज से आकर यहां चुनाव लड़ लेगा तो ये संभव नहीं है। एक बात याद रखना किसी की हेकड़ी नहीं चलने देंगे। महेश सोनी कोई ऊपर से बैठाया हुआ आदमी नहीं है। छात्र राजनीति के आंदोलनों से निकला आदमी है। पद छोड़ दूंगा लेकिन कार्यकर्ता के साथ नाइंसाफी नहीं होने दूंगा।

विधायक हो गए तो इसका मतलब तोप नहीं हो गए

उज्जैन नगर निगम क्षेत्र के बाहर का व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ पाएगा। चाहे वह विधायक रामलाल मालवीय हों या महेश परमार। चुनाव लड़ना है तो विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दें, ताकि यहां के कार्यकर्ता को वहां एडजस्ट कर सकें। फाॅर्म भरें, ये लड़ेंगे तो हमारे भरोसे ही ना। विधायक हो गए तो इसका मतलब तोप नहीं हो गए। संगठन अपने हिसाब से काम करता है।

उज्जैन महापौर पद का प्रत्याशी तो स्थानीय कांग्रेस नेता ही होगाः अध्यक्ष

उन्होंने कहा कि बाहरी आकर लड़ेगा तो वर्षों से जो दलित समाज के कार्यकर्ता संघर्ष कर रहे हैं वो कहां जाएंगे। उन्हें कब मौका मिलेगा। उन्हें हम प्राथमिकता देंगे। ये सही है कि प्रदेश कांग्रेस ने फाॅर्मेट के लिए हमसे बोला नहीं है लेकिन ये एक प्रयोग है। दावेदारों का जनता से जुड़ाव का पता चलेगा। पार्टी हाइकमान जो भी निर्णय लेंगा उसे मानेंगे। मगर किसी की दादागिरी नहीं चलने देंगे। नगर निगम क्षेत्र के कार्यकर्ता जो वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं वो लोकल हैं।

वो जमाने गए कि प्रेमचंद गुड्‌डू आकर लड़ जाएं

वो जमाने गए कि प्रेमचंद गुड्‌डू आकर लड़ जाएं। विधायक बनकर नहीं आएं। एक आम कार्यकर्ता बनकर आएं। ये नियम हमारी कोर कमेटी ने बनाया है। कोई दिल्ली से उम्मीदवार बनकर आता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। मगर कोई दादागिरी करके चैलेंज करके बात करता है तो फिर ये उसके लिए भी ठीक नहीं है।

मामला क्या है, कांग्रेस अध्यक्ष का कौन सा फार्मूला है जिस पर विवाद हो रहा है

शहर कांग्रेस अध्यक्ष महेश सोनी ने बताया कि उज्जैन में एक नया प्रयोग किया जा रहा है। जिसे प्रदेश कांग्रेस ने सराहा है। इस बार महापौर के प्रत्येक दावेदारों को हर वार्ड से कम से कम 50 कांग्रेसी परिवारों का समर्थन पत्र लाना जरूरी है। इससे दावेदारों की जमीनी हकीकत पता चलेगी। साथ ही यह भी शपथ पत्र लिया जा रहा है कि अगर टिकट नहीं मिला तो वे निर्दलीय नहीं लड़ेंगे। इससे चुनाव में पार्टी को अंदरूनी भितरघात से बचाया जा सकेगा। समर्थन पत्र के साथ दावेदारी करने की अंतिम तिथि पांच फरवरी है। अब तक करीब 24 लोगों ने आवेदन किया है। जिसमें से दो दावेदारों बाबूलाल चौहान और कैलाश नागवंशी ने तो समर्थन पत्र भी जमा कर दिया।

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