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लोकायुक्त पुलिस को चाय समोसे खिलाने वाले खनिज अधिकारी को VRS की तैयारी - MP NEWS

भोपाल
। मध्य प्रदेश के खनिज अधिकारी प्रदीप खन्ना को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की तैयारी कर ली गई है। इसे बर्खास्तगी की कार्रवाई करके प्रचारित किया जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग में अभिमत के लिए प्रस्ताव मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के पास भेजा है। इसके बाद उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि सितंबर के महीने में लोकायुक्त पुलिस के छापे के दौरान खनिज अधिकारी पुलिस वालों को चाय समोसे खिलाते हुए नजर आ रहे थे। लोकायुक्त के रिकॉर्ड में उनके पास से 4 करोड रुपए की संपत्ति मिली है। 

32 साल की नौकरी में छह बार सस्पेंड हो चुके हैं खनिज अधिकारी खन्ना

मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि जिला खनिज अधिकारी खन्ना 32 साल की नौकरी में 6 बार सस्पेंड हो चुके हैं। मुख्यमंत्री ने खनिज विभाग की बैठक में 7 सितंबर को खन्ना जैसे अफसरों को बर्खास्त करने और दागी अफसरों को हटाने के निर्देश दिए थे। 

भ्रष्टाचार नहीं 20:50 फार्मूले के तहत VRS दिया जा रहा है

खन्ना के खिलाफ 20:50 के फार्मूलें के तहत कार्रवाई की जा रही है। इस नियम के तहत उन अफसरों के सर्विस रिकार्ड की जांच की जाती है, जिनकी उम्र 50 से ज्यादा हो गई है या फिर 20 साल की नौकरी पूरी हो गई है। इस फार्मूले के तहत खनिज विभाग ने खन्ना के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव बना कर जीएडी को भेजा था।

छापे के समय तनाव में नहीं थे खनिज अधिकारी खन्ना

मध्य प्रदेश की लोकायुक्त पुलिस ने इसी साल 4 सितंबर को आय से अधिक संपत्ति मामले में खनिज अधिकारी प्रदीप खन्ना के भोपाल और इंदौर स्थित 3 ठिकानों पर छापेमारी की थी। छापे के दौरान खनिज अधिकारी खन्ना लोकायुक्त पुलिस की टीम को चाय समोसे खिलाते हुए निश्चिंत नजर आए थे। छापे में खनिज अधिकारी के पास 4 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति मिली थी।इसके साथ ही सर्चिंग में टीम को जमीन से जुड़े कई दस्तावेज, भोपाल में बंगला, 13 लाख की ज्वैलरी, एक किलो चांदी, 9 लाख रुपए नकद, दो कार और चार दोपहिया वाहन मिले थे। वहीं, इंदौर में एक फ्लैट और बायपास स्थित नया मकान मिला था, जिसे सील कर दिया है। लोकायुक्त खन्ना के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का केस दर्ज कर जांच कर रही है।

VRS सजा नहीं सुविधा होती है, बर्खास्तगी दंड होता है 

यहां बताना जरूरी है कि अनिवार्य सेवानिवृत्ति कर्मचारी के लिए सजा नहीं बल्कि सुविधा होती है। ऐसी स्थिति में उसे सभी प्रकार के वेतन भत्ते एवं पेंशन का लाभ मिलता है। जबकि यदि किसी को बर्खास्त किया जाए तो प्रशासनिक दृष्टि से यह एक दंड होता है। उसे पेंशन का लाभ नहीं मिलता। यहां उल्लेख करना उचित होगा कि दिग्विजय सिंह शासनकाल में एक अधिकारी की अकूत संपत्ति मिलने पर उसे बर्खास्त करके भ्रष्टाचार के मामले में बचाया गया था। उसका काला धन आज भी भोपाल के बाजार में ब्याज पर चलता है।

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