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कर्मचारियों के खिलाफ बिजली कंपनी की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज - MP EMPLOYEE NEWS

जबलपुर
। कर्मचारियों की रिटायरमेंट आयु को लेकर मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी गई है। कंपनी अपने कर्मचारियों को 58 साल की आयु में रिटायर करना चाहती थी परंतु अब बिजली कर्मचारी 62 वर्ष तक सेवा दे सकते हैं।

कर्मचारियों की ओर से 8 वकील पेश हुए थे

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर व जस्टिस संजय खन्ना की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान बिजली कर्मियों की ओर से अधिवक्ता फारूख रसीद, हर्ष पाठक, सविता महाजन, अरविंद चौपड़ा, मोहित चौबे, सिद्धार्थ शुक्ला, केबी उपाध्याय व एसआर सेठिया ने पक्ष रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने बिजली कंपनी की याचिका पर क्या टिप्पणी की

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद अपना रुख साफ करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का आदेश विधिसम्मत है। लिहाजा, सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करने की स्थिति में नहीं है। विद्युत कंपनी की विशेष अनुमति याचिका सारहीन होने के कारण खारिज की जाती है।

बिजली कंपनी के कर्मचारियों के रिटायरमेंट मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का फैसला क्या है

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने 13 जुलाई, 2017 को बिजली कर्मियों के हक में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया था। इसके जरिये सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष से 60 वर्ष के लिए विकल्प पत्र भरने की स्वतंत्रता दे दी थी। कोर्ट ने साफ कर दिया था कि बिजली कर्मी 58 वर्ष की आयु पूर्ण करने से पूर्व कभी भी विकल्प पत्र दे सकता है।

हाई कोर्ट में रिट खारिज होने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट चली गई थी कंपनी

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने हाई कोर्ट में रिट अपील दायर की थी। जिसके खारिज होने के बाद मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट की राह पकड़ ली।

बिजली कंपनी के कर्मचारियों को क्या फायदा हुआ

सुप्रीम कोर्ट से मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड की विशेष अनुमति याचिका खारिज होने के साथ ही मध्य प्रदेश के बिजली कर्मियों को बड़ी राहत मिल गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि अब जो बिजली कर्मी 58 वर्ष की अर्द्धवार्षिकी आयु (रिटायरमेंट एज) से पूर्व विकल्प पत्र भर देंगे, उनके लिए 62 वर्ष में सेवानिवृत्त होने का रास्ता साफ हो जाएगा। जबकि 60 वर्ष में सेवानिवृत्ति का विकल्प पत्र स्वीकार हो जाने पर राज्यपाल के अध्यादेश के अनुसार 62 वर्ष में सेवानिवृत्ति का भी लाभ मिल सकेगा। इस आशय का आदेश 31 मार्च, 2018 से विद्युत कंपनियों के संदर्भ में लागू है।

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