INDORE हाई कोर्ट के फैसले पर अटार्नी जनरल ने कहा: इस नाटक की निंदा की जानी चाहिए - MP NEWS

Updesh Awasthee

नई दिल्ली। इंदौर हाई कोर्ट के एक फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अटार्नी जनरल ने कहा कि इस नाटक की निंदा की जानी चाहिए। लगता है अदालत अपने दायरे से बाहर चली गई। जजों को शिक्षित करने की जरूरत है। मामला छेड़छाड़ के एक आरोपी को जमानत देने का है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर बेंच ने इस शर्त पर आरोपी को जमानत दे दी थी कि रक्षाबंधन के दिन आरोपी पीड़िता के घर जाएगा, राखी बंधवाएगा और पीड़िता को ₹11000 देगा।

9 महिला वकीलों ने इस तरह से जमानत के खिलाफ याचिका दाखिल की है

सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल (एजी), याचिकाकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं से इस मुद्दे पर नोट प्रसारित करने और तीन सप्ताह के बाद मामले की सुनवाई को कहा है। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर अटॉर्नी जनरल के वेणुगोपाल की मदद मांगी थी। 9 महिला वकीलों ने जमानत की शर्त को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। दलीलों में कहा गया है कि इस तरह के आदेश महिलाओं को एक वस्तु की तरह दिखाते हैं।

मामला क्या है
दरअसल, 30 जुलाई को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने छेड़छाड़ के आरोपी को सशर्त जमानत दी थी। शर्त यह है कि आरोपी रक्षाबंधन पर पीड़ित के घर जाकर उससे राखी बंधवाएगा और रक्षा का वचन देगा। आरोपी विक्रम बागरी उज्जैन जेल में बंद है। अप्रैल में पड़ोस में रहने वाली महिला के घर में घुसकर छेड़छाड़ के आरोप में जेल में बंद विक्रम बागरी ने इंदौर में जमानत याचिका दायर की थी। 

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने क्या डिसीजन दिया

सभी पक्षों के तर्क सुनने के बाद जस्टिस रोहित आर्या की सिंगल बेंच ने आरोपी को 50 हजार के मुचलके के साथ जमानत दी। उसमें शर्त यह भी थी कि वह 3 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन 11 बजे अपनी पत्नी को साथ लेकर पीड़ित के घर राखी और मिठाई लेकर जाएगा और पीड़िता से आग्रह करेगा कि वह उसे भाई की तरह राखी बांधे। इसी के साथ विक्रम पीड़ित की रक्षा का वचन देकर भाई के रूप में परम्परा अनुसार उसे 11000 रुपये देगा और पीड़िता के बेटे को भी 5 हजार रुपये कपड़े और मिठाई के लिए देगा।

इतना ही नहीं, आदेश में, इस सबकी तस्वीरें रजिस्ट्री में जमा कराने के निर्देश भी कोर्ट ने दिए थे। कहा गया कि आरोपी को लिखित में ये भी देना होगा कि वह कोविड-19 को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार के सोशल डिस्टेंसिंग के साथ समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करेगा। 
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