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बहती नदी पर इंजीनियर पुल कैसे बनाते हैं, लोग बरसात में घर नहीं बना पाते / GK IN HINDI

सभी जानते हैं, बारिश के दिनों में ज्यादातर निर्माण कार्य बंद कर दिए जाते हैं। बरसात में लोग घर नहीं बनाते क्योंकि पानी के कारण मसाला सूख नहीं पाता और जब तक मसाला नहीं सूखता तब तक ढांचा खड़ा नहीं हो सकता। सवाल यह है कि बहती हुई नदी पर इंजीनियर पुल कैसे बना देते हैं। पानी के अंदर पुल का पिलर कैसे खड़ा किया जाता है। आइए जानते हैं:-

गुड़गांव हरियाणा में रहने वाले मोहम्मद इस्लाम (Diploma in Civil Engineering) जो इन दिनों Toshiba JSW Power system को अपनी सेवाएं दे रहे हैं, बताते हैं कि 2011 से 2016 तक भवन निर्माण की कंपनियों में काम करने के बाद 2016 में मैंने एक पुल निर्माण करने वाली Toshiba JSW कंपनी में बतौर quantity surveyor के रूप में ज्वाइन किया और पुल निर्माण की प्रक्रियाओं को नजदीक से देखा।

नदी के पानी के नीचे पुल की नींव का निर्धारण कैसे किया जाता है

पुल का अभिकल्पन (डिजाइन) करते समय पानी की अधिकतम और न्यूनतम गहराई, पानी के बहाव की गति, पानी के नीचे की मिट्टी की प्रकृति, पुल का भार, पुल पर चलने वाले वाहनों का भार आदि के हिसाब से पुल की नींव (Foundation) का प्रकार तय किया जाता है, और फिर नींव का अभिकल्पन किया जाता है।
पानी में बने पुल की नींव की सामान्यतः दो प्रकार की होती है- 1. Pile Foundation 2.Well Foundation

बहते हुए पानी में पिलर की नींव का काम कैसे करते हैं


इसके लिए पानी में एक टेम्पररी एकसेस के लिए एक मजबूत लोहे का पुल बना लिया जाता है। इस पुल की सहायता से पानी में लकड़ी की बल्ली (wood pile) वृत्ताकार आकार में धंसा दी जाती हैं। इनके बीच में रेत से भरे बोरे फंसा दिए जाते हैं। अब शुरू होता है इस वृत्त में रेत या मिट्टी भरने का काम। जब मिट्टी पानी के सतह से ऊपर आ जाती है तो लोहे के पुल से फाउंडेशन के निर्माण हेतु इंजीनियर, मजदूर और मशीन अपना काम शुरू करती हैं। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article
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