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मीडिया को किसी भी मुद्दे पर स्टोरी करने का हक है: हाई कोर्ट / DEFAMATION CASE HIGH COURT DECISION

नई दिल्ली। मद्रास हाई कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि मीडिया को किसी भी मुद्दे पर स्टोरी करने का हक है। यदि हाईकोर्ट ने किसी मामले में नोटिस जारी किया है तो वह मामला सार्वजनिक हो जाता है। निजी नहीं रहता।

मीडिया पर बढ़ते अवमानना के मामले पर मद्रास हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ऐसे केस कुछ राजनीतिज्ञों और कारोबारियों के लिए मीडिया को डराने का हथियार बन गए हैं। हाईकोर्ट ने इस कड़ी टिप्पणी के साथ ही दो पत्रकारों और एक अंग्रेजी दैनिक अखबार के खिलाफ चल रही अवमानना मामलों की सुनवाई रद्द कर दी। 

जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने हाल ही में इन मामलों को खारिज करते हुए कहा, आपराधिक मानहानि के मामले उन कारोबारी संस्थाओं और ताकतवर राजनेताओं के लिए धमकाने का एक साधन बन गए हैं, जिनके हाथ काफी लंबे हैं। 

मीडिया को किसी भी मुद्दे पर स्टोरी लिखने का हक है

जज ने कहा, मीडिया को किसी मुद्दे पर स्टोरी प्रस्तुत करने का हक है। जब हाईकोर्ट ने रेत के अवैध खनन के आरोपों पर नोटिस जारी किया और जब यह सवाल सार्वजनिक तौर पर उठाया गया तो इस स्टोरी को छापने का अधिकार मीडिया को है।  

मामूली गलती पर अदालती सुनवाई का मतलब नहीं

जज ने रिपोर्टिंग में मात्र मामूली गलतियों को देखते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसी मामूली गलती पर अदालती कार्यवाही शुरू करने का औचित्य साबित नहीं कर सकते हैं। हमेशा गलतियों को सुधारा जा सकता है। हालांकि, यह सुधार तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। 

यह था मामला
अखबार में 2015 में खनन में अनियमितता बरतने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका के आधार पर एक रिपोर्ट छपी थी, जिसे लेकर वीवी मिनरल्स कंपनी ने अखबार के खिलाफ अवमानना के केस किए थे। बाद में यह मामला हाईकोर्ट में चला गया।

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