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अनुच्छेद 21 जीवन का अधिकार देता है तो फिर मृत्यु का अधिकार क्यों नहीं, पढ़िए / ABOUT IPC

हमारे भारतीय संविधान में अनुच्छेद 21 में व्यक्ति को जीवन का अधिकार या प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण प्राप्त है परंतु भारतीय दण्ड संहिता, 1860 के अनुसार वह व्यक्ति अपनी मर्जी से आत्महत्या नहीं कर सकता है। आईपीसी के तहत 'आत्महत्या का प्रयास' एक अपराध है। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया के लोकतांत्रिक देशों का मानना है कि पृथ्वी पर उपस्थित सभी प्रकार के जीवन (चाहे वो मनुष्य हों, जानवर या वनस्पति) को अपनी आयु पूरी करने का अधिकार है। यह उसका प्रकृति प्रदत्त अधिकार है जिसे संवैधानिक अधिकार कहा गया। 

भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 309 की परिभाषा:-

अगर कोई व्यक्ति किसी भी तरह की परेशानी में आकर आत्महत्या का प्रयास करता है तो वह व्यक्ति इस धारा के अंतर्गत दोषी पाया जाएगा।
नोट:- आत्महत्या एक ऐसा अपराध है जिसमें यदि व्यक्ति सफल होता है तो उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती, क्योंकि 'आत्महत्या का प्रयास' अपराध माना गया है। 'आत्महत्या' के लिए कोई कानून नहीं है। 

आईपीसी की धारा 309 के तहत दण्ड का प्रावधान:-

यह अपराध समझौता योग्य नहीं है परन्तु यह अपराध संज्ञये एवं जमानतीय होते हैं। इनकी सुनवाई किसी भी मजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती हैं। सजा-: इस अपराध में एक वर्ष की साधारण कारावास या जुर्माना या दोंनो से दण्डित किया जा सकता है।

उधारानुसार वाद:- तमिलनाडु राज्य बनाम सिबरासन - आरोपी पर दोष लगाया कि उसने आत्महत्या का प्रयास किया था परन्तु आरोपी ने स्वयं भी स्वीकार किया था कि जब उसे पुलिस ने हिरासत में लेने का प्रयत्न किया था, तभी उसने अपने मुँह में साइनाइड की एक केपसूल डालकर उसे चबा लिया था। उच्चतम न्यायालय ने आरोपी को धारा 309 के अंतर्गत दण्डित किया।
बी. आर. अहिरवार होशंगाबाद(पत्रकार एवं लॉ छात्र) 9827737665


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