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7 फेरे नहीं हुए लेकिन मैरिज सर्टिफिकेट है तो क्या शादी मान्य होगी, हाईकोर्ट का फैसला पढ़िए | KNOW YOUR LAW

नई दिल्ली। हिंदू संप्रदाय में विवाह की वैधता के लिए सबसे जरूरी क्या है, चंडीगढ़ हाई कोर्ट ने इस संदर्भ में फैसला सुनाया है। एक युवक की याचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत समाज के सामने सात फेरे अत्यंत आवश्यक है। केवल मैरिज सर्टिफिकेट विवाह की वैधता प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। 

युवक ने अपनी शादी के समर्थन में फोटो और मैरिज सर्टिफिकेट पेश किया था

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह अहम टिप्पणी कुरुक्षेत्र निवासी याची द्वारा पंचकूला जिला अदालत द्वारा जारी तलाक की डिक्री को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए की। याचिका दाखिल करते हुए रोहतक निवासी याची ने हाईकोर्ट को बताया कि वह प्रतिवादी पत्नी को चार साल से जानता था तथा वे दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे। इसी बीच पंचकूला के प्राचीन शिव दुर्गा मंदिर में शादी कर ली। शादी की फोटो भी खींची गई थी। याची ने कहा कि विवाह समारोह के दौरान सिंदूर व सात फेरे दोनों संपन्न हुए थे। उसने मैरिज सर्टिफिकेट भी कोर्ट के समक्ष रखा और कहा कि यह सत्यापित करता है कि शादी वैध थी।

प्रतिवादी पत्नी ने कहा सात फेरे नहीं हुए इसलिए शादी अवैध है

वहीं, प्रतिवादी पत्नी की ओर से कहा गया कि याची उसे प्राचीन शिव मंदिर में लेकर गया था लेकिन वहां पर सात फेरे नहीं हुए थे। इसके बाद वह याची के साथ एक दिन भी नहीं रुकी। याची ने उसे अपने प्रभाव में लेकर मैरिज सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर ले लिए थे। इस पर याची ने कहा कि वह अपनी पत्नी के साथ दो दिन कुरुक्षेत्र में रुका था और इसके बाद लड़की के पिता उनके घर आए और शादी को अपनाने की बात कही।

हाईकोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी

साथ ही यह भी कहा कि वे अपनी बेटी को घर ले जाना चाहते हैं ताकि विदाई समारोह के साथ उसे याची के घर भेज सकें। इसके बाद उन्होंने लड़की पर दबाव बनाया और उन्होंने शादी को समाप्त करने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए जिला अदालत द्वारा दिए गए तलाक के आदेशों पर मोहर लगाते हुए याचिका खारिज कर दी।

7 फेरे प्रमाणित नहीं हुए, केवल मैरिज सर्टिफिकेट पर्याप्त नहीं

याचिका खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि याची फोटो को सही प्रमाणित करने में नाकाम रहा और सात फेरे भी साबित नहीं कर पाया। इसके अभाव में केवल मैरिज सर्टिफिकेट को आधार मानकर शादी को वैध करार नहीं दिया जा सकता। हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार सातवें फेरे के बाद ही दो हिंदुओं का विवाह पूर्ण माना जा सकता है


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