भरत यादव (IAS) कलेक्टर जबलपुर पर जुर्माना, जानकारी छुपाने का आरोप | MP NEWS
       
        Loading...    
   

भरत यादव (IAS) कलेक्टर जबलपुर पर जुर्माना, जानकारी छुपाने का आरोप | MP NEWS

भोपाल। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी भरत यादव पर जानकारी छुपाने के आरोप में ₹5000 का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा नगरीय प्रशासन विभाग के तत्कालीन अवर सचिव आर एस वर्मा के खिलाफ ₹25000 का जुर्माना लगाने के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विदिशा के अपीलकर्ता अचल कुमार दुबे को क्षतिपूर्ति राशि के तौर पर ₹ 2000 का हर्जाना देने का आदेश भी आयोग द्वारा जारी किया गया है। 

ढाई साल तक जानकारी को छुपाने का प्रयास करते रहे

राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने इस प्रकरण में आदेश जारी करते हुए कहा कि ढाई वर्ष चले इस प्रकरण में लोक सूचना अधिकारी की टीम एक ऐसा फिक्स्ड मैच खेलते हुए नज़र आये। जहाँ सूचना के अधिकार की उल्लघंन के लिए कोई भी अधिकारी अपने आप को दोषी नही मानता है। और मैच में सबका एक ही लक्ष्य है कि अपीलकर्ता को जानकारी ना दी जाए। 

कलेक्टर भरत यादव ने कार्रवाई से बचने के लिए गुहार लगाई थी लेकिन खारिज हो गई

इसमे जबलपुर कलेक्टर भरत यादव ने अपना पक्ष रखते हुए आयोग से गुहार लगाई थी कि उनके ऊपर कार्रवाई ना कि जाए क्योंकि उनके सामने इस RTI प्रकरण की नास्ति नहीं प्रस्तुत की गई थी। यादव ने ये भी कहा कि सहायक लोक सूचना अधिकारी द्वारा जारी जवाब के एक महीने बाद उनकी नियुक्ति नगरीय प्रशासन विभाग में लोक सूचना अधिकारी के रूप में हुई थी। पर राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने भारत यादव की अपील को इस आधार पर ख़ारिज कर दिया कि प्रथम अपीलीय अधिकारी के जानकारी देने के आदेश श्री भरत यादव के लोक सूचना अधिकारी के रूप में नियुक्त होने के बाद ही आये थे इसलिए यादव जानकारी देने के लिए बाध्य थे। श्री राहुल सिंह ने अपने आदेश में कहा कि लोक सूचना अधिकारी अपनी जवाबदेही से यह कहकर नहीं बच सकते की बाबू या सहायक लोक सूचना अधिकारी द्वारा उनके समक्ष प्रकरण प्रस्तुत नहीं किया गया था। यही वजह है कि 30 दिन में दी जाने वाली जानकारी को देने में विभाग के लोक सूचना अधिकारियों ने ढाई वर्ष से अधिक का समय लगा दिया।

आईएएस अफसर गोपाल चंद्र और राजीव निगम को चेतावनी

इस प्रकरण मे तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी रहे गोपाल चंद्र डाड जो कि वर्तमान में मंदसौर कलेक्टर है और राजीव निगम उप सचिव नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल को प्रकरण के निराकरण में लापरवाही बरतने में कुछ बिंदुओं पर ज़िम्मेदार मानते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने दोनों को चेतावनी देते हुए भविष्य में सूचना के अधिकार प्रकरणों की समय सीमा में कार्रवाई के लिए सचेत करते हुए कारण बताओ सूचना पत्र की कार्रवाई से विमुक्त किया है।

तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी गोपाल चंद्र  डाड ने आयोग के समक्ष कहा कि वे मात्र 26 दिन प्रकरण में लोक सूचना अधिकारी रहे और समय सीमा 30 दिन की होती है इसलिए उन पर कार्रवाई ना कि जाए। इस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि सूचना के अधिकार कानून में 30 दिन के भीतर में जानकारी देने का प्रावधान है। ना कि 30 दिन के बाद या तीसवें दिन निराकरण करने का प्रावधान है। डाड ने 26 दिन के अपने कार्य प्रभार में इस आरटीआई प्रकरण पर कोई भी कार्यवाही नहीं की जिससे स्पष्ट हो सके कि उनकी मंशा जानकारी देने की थी। वहीं सूचना के अधिकार कानून के तहत अगर 26 दिन तक कोई कार्यवाही नहीं होना मान्य किया जाए तो महीने के बाकी के बचे 4 दिन को लेकर नए पदस्थ लोक सूचना अधिकारी का यह तर्क भी मान्य करना पड़ेगा कि उनको सिर्फ 4 दिन मिले थे 30 दिन की मियाद खत्म होने में ऐसे में किसी भी अधिकारी की भूमिका जानकारी देने के लिए तय नहीं हो पाएगी। डाड द्वारा 26 दिन तक इस प्रकरण में कोई कार्रवाई नहीं की गई जिससे स्पष्ट हो पाए कि बाकी के बचे 4 दिन में अपीलकर्ता को जानकारी मिल सकती थी।

सीएमओ और कार्तिकेय के कथित घोटाले की जानकारी मांगी थी

आरटीआई में विदिशा में सीएमओ आर कार्तिकेय के द्वारा किये गए कथित घोटाले की जांच रिपोर्ट और इससे जुड़े हुए अन्य दस्तावेज मांगे गए थे। घोटाले की शिकायत अचल कुमार दुबे द्वारा की गई थी। विदिशा के अधिवक्ता  अचल कुमार दुबे ने इस प्रकरण में आरटीआई दायर कर जानकारी मांगी थी। घोटाले की जांच 2016 में नगरीय प्रशासन विभाग भोपाल स्तर पर की गई थी।

आर एस वर्मा (आईएएस) ने गलत तरीके से जानकारी रोकने की कोशिश की

सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने जब सभी दस्तावेजों की जांच की तो पाया कि सहायक लोक सूचना अधिकारी उप सचिव नगरीय प्रशासन विभाग आरएस वर्मा ने गलत तरीके से जानकारी रोकने का प्रयास किया जानकारी से संबंधित कुछ दस्तावेज उनके पास पहले से ही मौजूद थे लेकिन उन्होंने जानबूझकर अपीलकर्ता को यह कहकर के जानकारी देने से मना कर दिया कि मामले की जांच चल रही है दस्तावेज उपलब्ध होने पर दे दिए जाएंगे। बाद में प्रथम अपीलीय अधिकारी का आदेश भी आ गया उसके बाद भी उन्हें जानकारी नहीं दी गई।