मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के दागी अधिकारियों को प्रोत्साहन योजना, कई अधिकारी लाभान्वित | MP NEWS
       
        Loading...    
   

मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार के दागी अधिकारियों को प्रोत्साहन योजना, कई अधिकारी लाभान्वित | MP NEWS

भोपाल। खबर तो यही बनती है। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के दागी अधिकारियों को प्रोत्साहन के लिए विशेष योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत कई अधिकारियों को लाभान्वित किया गया है। भ्रष्टाचार के मामले में लोकायुक्त द्वारा पकड़े जाने के बावजूद उनके खिलाफ कोई विभागीय कार्यवाही नहीं की गई। इस तरह दागी अधिकारियों को संरक्षित करने का काम सफलतापूर्वक किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों ने इस योजना की सफलता के लिए एक नए संशोधन का ड्राफ्ट तैयार किया है। जल्द ही ऐसे अधिकारियों को प्रमोशन एवं दूसरे सरकारी लाभ दिए जाएंगे। (आप ही बताइए इसके अलावा और क्या शब्द हो सकते थे, जिस सरकार में भ्रष्टाचार को संस्कार मान लिया गया हो, वहां सरकार पर लांछन तो नहीं लगाया जा सकता। सफलता को सफलता ही लिखना पड़ेगा।) विश्वास नहीं होता तो लिस्ट पढ़ लीजिए: 

केस नंबर-01: इंदौर के सहायक आबकारी आयुक्त आलोक खरे पर कुछ महीनों पहले लोकायुक्त ने छापेमार कार्रवाई की थी। विभाग ने कार्रवाई करने की जगह उनको भोपाल संभाग के उड़नदस्ते जैसे महत्वपूर्ण पद का प्रभारी बना दिया है। अब जबकि उड़न दस्ते में ही भ्रष्टाचार का आरोपी अधिकारियों का तो उड़नदस्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ क्या कर लेगा।
केस नंबर-02: दूसरा मामला भी आबकारी विभाग से जुड़ा है। लोकायुक्त ने धार जिले के आबकारी अधिकारी पराक्रम सिंह पर भी छापा मारा था। इस कार्रवाई के बाद लोकायुक्त ने विभाग को लिखा था कि आरोपी अधिकारी को पद से हटाया जाए। वरिष्ठ अधिकारियों ने लोकायुक्त की चिट्ठी पर कार्रवाई की और पराक्रम सिंह को धार से हटाकर खरगोन का जिलाधिकारी बना दिया। बताइए, इससे पद से हटाना कहते हैं क्या। यह तो तबादला हुआ ना।

केस नंबर-03: तीसरा मामला पुलिस विभाग से जुड़ा है। बैतूल जिले के भैंसदेही में एसडीओपी एमएस बड़गूजर को पिछले साल नंवबर में आठ हजार की रिश्वत लेते रंग हाथों पकड़ा गया था। नियम अनुसार उन्हें सस्पेंड किया जाना चाहिए था परंतु नहीं किया। कोई विभागीय कार्रवाई नहीं हुई।
केस नंबर-04: चौथा मामला जल संसाधन विभाग का है। इस विभाग के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पर पिछले साल जुलाई में छापा पड़ा था। इंजीनियर को तत्काल सस्पेंड किया जाना चाहिए था परंतु नहीं किया। वह अभी भी अपनी जगह पर काम कर रहे हैं।

केस नंबर-05: पांचवां मामला सतना जिले का है। लोकायुक्त ने जिले के चित्रकूट में जनपद सीईओ रमाकांत शुक्ला के ठिकानों पर छापेमार कार्रवाई की। आय से अधिक संपत्ति का खुलासा हुआ था। सीईओ को भी सस्पेंड किया जाना चाहिए था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।