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उच्च शिक्षा विभाग की निर्दयता की भेंट चढ़ा एक और अतिथि विद्वान | ATITHI VIDWAN NEWS

भोपाल। मध्यप्रदेश का उच्च शिक्षा विभाग इन दिनों एक ऐसे अजगर के समान हो चुका है जो एक के बाद एक निरीह अतिथिविद्वानों को समाप्त करता जा रहा है। अतिथिविद्वान पिछले दो माह से भोपाल स्थित शाहजहानी पार्क में अपने अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं किन्तु न तो इस प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री कमलनाथ अथवा उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी पर इसका कोई प्रभाव पड़ता नज़र आ रहा है। 

हाल यह है कि अनिश्चित भविष्य और आर्थिक तंगी ने अतिथिविद्वानों को अंदर से तोड़ कर रख दिया है। हालिया घटना शासकीय महाविद्यालय चंदिया जिला उमरिया में पदस्थ अतिथिविद्वान क्रीड़ाधिकारी संजय कुमार के साथ घटित हुई है। जहां अतिथिविद्वान संजय कुमार ने प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की नीतियों और आर्थिक तंगी के कारण फांसी के फंदे में लटक कर अपनी इहलीला समाप्त कर ली। अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह ने कहा है की नियमितीकरण की बाट जोहते और लगातार आर्थिक तंगी से परेशान होकर हमारे एक और साथी आज अपने जीवन कि लड़ाई हार गया है। मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ कि आखिर और कितने अतिथिविद्वानों की बलि की आवश्यकता है उच्च शिक्षा विभाग को।

नियमितीकरण और आर्थिक तंगी को लेकर परेशान थे संजय कुमार

अतिथिविद्वान नियमितिकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ मंसूर अली के अनुसार अतिथिविद्वान संजय कुमार अपने अनिश्चित भविष्य और प्रदेश सरकार द्वारा वचनपत्र में वादा करने के बाद भी नियमितिकरण में की जा रही देरी के कारण अत्यधिक तनावग्रस्त थे। अतिथिविद्वानों द्वारा लगातार किये जा रहे आंदोलनों का वे हिस्सा थे। यहां तक कि अतिथिविद्वानों द्वारा निकाली गई इंदौर से भोपाल एवं इसके पश्चात छिन्दवाड़ा से भोपाल की पदयात्रा में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई थी। अतिथिविद्वान भयंकर आर्थिक संकट के दौर से गुज़र रहे है। हाल यह है कि पिछले 6 माह से अधिक की अवधि बीतने के बाद भी मानदेय का भुगतान नही हुआ है। जिससे अतिथिविद्वानों और उनके पूरे परिवार के सामने रोज़ी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया है।

परिवार का एकमात्र सहारा भी छिन गया

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी डॉ जेपीएस चौहान के अनुसार अतिथिविद्वान संजय कुमार आने परिवार का एकमात्र सहारा थे। अपने पीछे रोते बिलखते छोटे छोटे बच्चे एवं इस घटना से हैरान व परेशान धर्मपत्नी को छोड़ गए हैं। पिता का देहांत पहके ही हो चुका था, जबकि बूढ़ी मां का एकमात्र सहारा भी सरकार की गलत नीतियों की भेंट चढ़ गया अब उनके परिवार व बूढ़ी मां को सहारा मुख्यमंत्रीजी देंगे अथवा उच्च शिक्षा मंत्री ? अतिथिविद्वानों की आर्थिक तंगी का आलम यह है कि पत्नी के पास अपने अभागे पति के शव को अपने गृहग्राम बलिया तक ले जाने के पैसे नही थे। आनन फानन में अतिथिविद्वनीं एवं स्थानीय प्रशासन के सहयोग से संजय कुमार एक शव उनके गृह जिले बलिया के लिए रवाना किया गया है। संजय कुमार का छोटा बच्चा पथराई आंखों से अपने पिता का इंतज़ार कर रहा था। मोर्चा के संयोजक डॉ सुरजीत भदौरिया ने कहा है कि आज अतिथिविद्वान कमलनाथ सरकार के राज में बेहद तनावग्रस्त जीवन बिता रहे हैं। सरकार ने नियमितिकरण  का वचन दिया था जिसे आज तक पूरा नहीं किया गया है। बल्कि लगभग 2700 अतिथिविद्वानों को फालेन आउट करके बेरोजगार करने का काम कमलनाथ सरकार ने किया है। जिससे बेहद तनावग्रस्त अतिथिविद्वान इस तरह के घातक कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं।

समस्या का हल केवल मुख्यमंत्री के पास

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी डॉ आशीष पांडेय के अनुसार अतिथिविद्वानों की इस समस्या का हल केवल मुख्यमंत्री कमलनाथ के पास है। पूर्व में उच्च शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारियों की ओर से भी ऐसे सुझाव सरकार को दिए गए है जिसमे कहा गया है कि सुपर न्यूमेरेरी पदों का सृजन करके अथवा कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर अपनी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समान कमलनाथ सरकार भी अतिथिविद्वानों का नियमितीकरण करके इस समस्या को आसानी से हल कर सकती है। किन्तु सब कुछ सरकार और मुख्यमंत्रीजी की राजनैतिक इक्षाशक्ति पर निर्भर करता है।