भाजपा अपने जन्म स्थान नागपुर में जिला परिषद का चुनाव हारी | NAGPUR ELECTION RESULT NEWS

Bhopal Samachar
नई दिल्ली। RSS के मुख्यालय और नितिन गडकरी के गढ़ नागपुर से भाजपा के लिए बुरी खबर आ रही है। भारतीय जनता पार्टी यहां जिला परिषद का चुनाव हार गई है। इस तरह के चुनाव किसी भी पार्टी के लिए बहुत प्रतिष्ठा पूर्ण नहीं होते परंतु यह चुनाव नागपुर में होने के कारण भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय कहा जाएगा। इस चुनाव के परिणाम को भारतीय जनता पार्टी की लोकप्रियता से जोड़ा जाएगा। बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का गृह क्षेत्र भी नागपुर है। 

गडकरी के गांव में हारा भाजपा उम्मीदवार

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गांव धापेवाड़ा से कांग्रेस के महेंद्र डोंगरे विजयी हुए। वहीं, बावनकुले के कोराडी जिला परिषद सर्कल में कांग्रेस के उमेदवार नाना कंभाले ने जीत दर्ज की। नाना कंभाले को 8223 वोट मिले और भाजपा प्रत्याशी संजय मैन्द को 6923 वोट मिले। नागपुर के हिंगना से पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता रमेश बंग के बेटे दिनेश बंग विजयी हुए। येनवा से शेतकरी कामगार पक्ष (शेकाप) के समीर उमप विजयी हुए। आरोली- कोदामेड़ी से कांग्रेस के योगेश देशमुख और गोधनी से कांग्रेस की ज्योति राऊत जीतीं। पथरई -वडंबा से कांग्रेस पार्टी की ज्येष्ठ सदस्य शांता कुमरे तीसरी बार विजयी हुए।

गृहमंत्री अनिल देशमुख का बेटा चुनाव जीता

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के बेटे सलील देशमुख ने नागपुर जिले में मंतपजरा जिला परिषद सीट से जीत हासिल की। येरखेड़ा सर्कल से भाजपा के उमेदवार मोहन माकडे 158 वोटों से जीते। वहीं, भीलगांव पंचायत समिति सर्कल से भाजपा के उमेश रड़के, कवठा पंचायत समिति सर्कल में कांग्रेस की उमेदवार दिशा चनकापुरे 345 वोटो से जीतीं। कोराडी पंचायत समिति सर्कल से भाजपा की सविता जिचकार, कारगांव क्षेत्र से कांग्रेस के उमेदवार शंकर डडमल जीते। वहीं बड़ेगांव, बडगॉव,वाकोडी जिला परिषद सीट कांग्रेस ने जीती।

शिवसेना ने झटका दिया, मंत्री गण ओवरकॉन्फिडेंस में थे

राजनीतिक जानकारों की मानें, तो अपने गढ़ में भाजपा की हार की सबसे बड़ी वजह राकांपा-कांग्रेस का गठबंधन और शिवसेना का अलग से चुनाव लड़ना है। शिवसेना ने सबसे ज्यादा भाजपा के वोट बैंक में चोट पहुंचाई। पिछला चुनाव शिवसेना-भाजपा साथ मिलकर लड़े थे।
कांग्रेस-राकांपा ने जिला परिषद पर कब्जे के लिए तीन मंत्रियों को मैदान में उतारा था, जिनमें  मंत्री नितिन राऊत, अनिल देशमुख, सुनील केदार शामिल थे। शपथ ग्रहण के बाद से ही सभी लगातार इस इलाके में सक्रिय रहे, जबकि भाजपा नेता फडणवीस, नितिन गडकरी क्षेत्र में नहीं गए।
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