राजगढ़ में भाजपा कार्यकर्ता पिट रहे थे, प्रदेश अध्यक्ष कहां थे ? | MP NEWS
       
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राजगढ़ में भाजपा कार्यकर्ता पिट रहे थे, प्रदेश अध्यक्ष कहां थे ? | MP NEWS

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की सक्रियता पर बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। मध्यप्रदेश के राजगढ़ में जब भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज हुआ, कलेक्टर ने पूर्व विधायक के गाल पर तमाचा मारा, डिप्टी कलेक्टर ने भाजपा कार्यकर्ताओं से तिरंगा झंडा छीना और थप्पड़ मारे, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह कहां थे। सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि इस घटना से पूरे 7 घंटे बाद (रात 10:00 बजे करीब) राकेश सिंह का बयान आया। सवाल लाजमी है राकेश जी ऐसी कौन सी जगह पर थी जो तत्काल मीडिया के सामने आकर एक बयान भी नहीं दे पाए। अपने ट्विटर अकाउंट पर निंदा तक नहीं कर पाए। शिवराज सिंह चौहान एक ऐसे नेता थे जिन्होंने घटना की तत्काल निंदा की। 

सांसद राकेश सिंह प्रदेश अध्यक्ष पद का दायित्व नहीं निभा पाए 

जबलपुर के भाजपा नेता राकेश सिंह लोकसभा सदस्य के रूप में कितने जिम्मेदार है इसकी समीक्षा कुछ समय बाद की जाएगी परंतु भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद का दायित्व राकेश सिंह कतई नहीं निभा पाए। प्रदेश अध्यक्ष बनने से लेकर अब तक राकेश सिंह की सबसे ज्यादा रुचि स्वागत करवाने में रही है। उनकी सोशल मीडिया प्रोफाइल बताती है कि वह माला पसंद नेता है। मालाओं से उन्हें बेहद लगावे। भाजपा को विपक्ष में रहते हुए 1 साल बीत गया लेकिन राकेश सिंह के अंदर विपक्षी पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष आज तक नजर नहीं आया। 

शिवराज सिंह को पीछे धकेलने में 1 साल बिता दिया 

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद जैसे ही भारतीय जनता पार्टी सत्ता से बाहर हुई पार्टी में एक अजीब तरह की खींचतान शुरू हो गई। कांग्रेस में नेता एक दूसरे पर चुनाव में हार की जिम्मेदारी डालते हैं परंतु भाजपा में ऐसा नहीं हुआ। हार की तो समीक्षा ही नहीं हुई, कुर्सी की रेस शुरू हो गई। मुख्यमंत्री कार्यालय से बाहर निकलते ही शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा के प्रदेश कार्यालय पर कब्जा कर लिया। राकेश सिंह ने अपनी पूरी ताकत शिवराज सिंह को भाजपा के प्रदेश कार्यालय से बेदखल करने में लगा दी। पिछला 1 साल शिवराज सिंह के फैसलों को बदलने और प्रभाव को कम करने में ही लगा रहा। मध्यप्रदेश में भाजपा के शुभचिंतकों के लिए यह बुरी खबर है कि पिछले 1 साल में एक भी बड़ा नेता पार्टी के लिए काम करता नजर नहीं आया। हां अपने निजी उद्देश्यों को पार्टी हित बताने के घटनाक्रम काफी हुए।