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अतिथिविद्वान नियमितीकरण का संघर्ष जीवन रक्षा की लड़ाई: नरोत्तम मिश्रा | MP NEWS

भोपाल। अतिथिविद्वानों का संघर्ष नौकरी बचाने के लिए नही बल्कि अपना जीवन एवं आस्तित्व बचाने  का संघर्ष है। अतिथिविद्वानों ने अपने जीवन के बहुमूल्य वर्ष इस व्यवस्था को अध्यापन करते हुए व्यतीत कर दिए है, अब नौकरी से बाहर कर दिये जाने पर वे कहीं के नही रहेंगे। जबकि सरकार ने अतिथिविद्वानों को नियामितिकरण का वचन भी दिया है। अतः मध्यप्रदेश शासन को उनकी नियामियिकरण की विधिसम्मत मांग को अविलंब स्वीकार करना चाहिए। 

उक्त उद्गार मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ भाजपा विधायक डॉ नरोत्तम मिश्रा ने व्यक्त किये। विदित हो कि डॉ मिश्रा भोपाल स्थित शाहजहांनी पार्क पहुँचें थे, जहां सूबे के शासकीय कालेजों में कार्यरत अतिथिविद्वान पिछले एक माह से सरकार से अपने नियमितीकरण की मांग करते हुए धरने एवं आंदोलन में बैठे हुए हैं। उन्होंने कहा कि शीतकालीन सत्र में हमने अतिथिविद्वानों के मुद्दे को प्रमुखता से सदन के पटल पर रखा था तथा विधानसभा के आगामी सत्र में भी अतिथिविद्वानो के मुद्दे पर सरकार को हम घेरने वाले है। 

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी डॉ जेपीएस चौहान एवं डॉ आशीष पांडेय ने कहा है कि  अतिथिविद्वान सरकार से कोई नई मांग न करते हुए सरकार द्वारा ही चुनाव पूर्व दिए गए वचन 17.22 को पूरा करने की मांग कर रहे है। हमारा आंदोलन पूर्णतः शांतिपूर्ण और विधिसम्मत तरीके से चल रहा है। सरकार से हम अपनी जायज़ मांग को पूरा करने का आग्रह लगातार कर रहे है। नियमितीकरण से कम हमें कुछ भी स्वीकार नही है।

आंदोलन सरकार के खिलाफ नही बल्कि शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रांतीय प्रवक्ता डॉ मंसूर अली ने कहा है कि शाहजहांनी पार्क में पिछले एक माह से जारी हमारा धरना एवं आंदोलन किसी भी प्रकार से सरकार के खिलाफ नही है। बल्कि यह अतिथिविद्वान जैसी शोषणकारी व्यवस्था के खिलाफ है। हमारी सरकार से मांग है कि सरकार अविलंब अतिथिविद्वान जैसी शोषणकारी व्यवस्था को समाप्त करते हुए अतिथिविद्वानो का कांग्रेस पार्टी के वचनपत्र की कंडिका 17.22 अनुसार नियमितीकरण करे। डॉ मंसूर अली ने आगे कहा है कि यह सरकार हमारी है। 

हमने अपने अथक परिश्रम से कांग्रेस पार्टी को सत्ता के सिंहासन तक पहुचाने में महती भूमिका का निर्वहन किया है। हम अपने द्वारा ही चुनी सरकार के बिल्कुल खिलाफ नही है बल्कि हम सरकार से चाहते है कि सरकार हमारे हितों का संरक्षण करे व कांग्रेस पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी  जी की मंशा अनुसार अतिथिविद्वान व्यवस्था को समाप्त करते हुए उसके स्थान पर अतिथिविद्वानों के लिए नियमितीकरण की नीति बनाई जाए। जैसा की राहुल गांधी ने विधानसभा चुनाव के पूर्व इंदौर में अपने वक्तव्य मे अतिथिविद्वान व्यवस्था को शोषणकारी बताया था।

नियमितीकरण तक जारी रहेगा आंदोलन

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजकद्वय डॉ देवराज सिंह एवं डॉ सुरजीत भदौरिया ने कहा है कि शाहजहानी पार्क में चल रहा हमारा आंदोलन हमारे नियमितीकरण तक जारी रहेगा। हम किसी भी प्रकार से चॉइस फिलिंग प्रक्रिया के पक्ष में नही है। हम केवल वचनपत्र अनुसार सरकार से अपने नियमितीकरण की मांग करते हैं। हमने अब तक मुख्यमंत्री जी से लेकर उच्च शिक्षा मंत्री एवं सभी उच्च अधिकारियों से प्रार्थना कर चुके है, किन्तु हमारे विषय मे अभी तक किसी भी प्रकार की प्रगति होती नही दिख रही है। यह हमारा अंतिम संघर्ष है जिसे हम अपनी अंतिम सांस तक जारी रखेंगे।