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अतिथि विद्वानों के आंदोलन को 25 से ज्यादा संस्थाओं ने समर्थन दिया | ATITHI VIDWAN NEWS

भोपाल। शाहजहांनी पार्क भोपाल में प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में कार्यरत अतिथिविद्वानों का आंदोलन 44 दिन से लगातार जारी हैं। अब तक विशाल जनसमर्थन के साथ लगातार जारी इन आंदोलन को अब तक भारी जनसमर्थन मिलता रहा है। यहां तक कि लगभग दो दर्जन से आधिक सामाजिक व धार्मिक संस्थानों ने धरना स्थल पर पहुँचकर अतिथिविद्वानों के आंदोलन को अपना समर्थं प्रदान किया है। 

अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह ने बताया कि हमारे आंदोलन को अब तक विभिन्न संस्थाओं से समर्थंन पत्र प्राप्त हुए हैं। इसी कड़ी में इसी कड़ी में आज भगत सिंह सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष दादा गुरु हरियाणा व ग्वालियर के ख्यातिलब्ध शिक्षाविद श्री डी के शर्मा अतिथिविद्वानों के पंडाल में समर्थंन देने हेतु उपस्थित हुए। इस बीच उपस्थितजन ने पंडाल में मौजूद अतिथि विद्वानों का हाल जाना व अत्यंत कष्टप्रद स्थितियों में समय गुज़ार रहे अतिथिविद्वानों की मांगों पर अपनी सहमति जताई। मोर्चा के संयोजक डॉ सुरजीत भदौरिया के अनुसार श्री शर्मा ने अतिथिविद्वानों के आंदोलन में हरसंभव सहायता का वादा किया एवं आंदोलन को भोपाल के साथ साथ दिल्ली तक संचालित करने हेतु सुझाव दिया एवं इस दौरान आंदोलन में हर प्रकार से सहायता करने का आश्वासन भी दिया।

मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष से मिला अतिथि विद्वानों का प्रतिनिधिमंडल 

अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के मीडिया प्रभारी डॉ आशीष पांडेय एवम् डॉ जेपीएस चौहान ने बताया कि विगत 44 दिनों से महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों को लेकर दिव्यांग अतिथि विद्वान बरसों की सेवा के बाद बेरोजगार होकर शाहजहानी पार्क में बेहद कष्टप्रद जिंदगी जीने को मजबूर हैं यहां तक कि शासन की संवेदनहीनता के कारण अतिथि विद्वान बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं और असमय मौत के मुंह में समा रहे हैं। 8 महीने से वेतन के अभाव में तथा  बेरोजगार होने के कारण  भरण पोषण कर पाने और बच्चों को पालने में असमर्थ हो गए हैं, बच्चों का स्कूल भी छूट गया है। कुछ दिव्यांग भीख मांगने पर मजबूर हो रहे हैं। यह सीधे-सीधे मानव अधिकारों का हनन है। इस सिलसिले में आज अतिथि विद्वानों का प्रतिनिधि मंडल मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष से मिला  मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र कुमार जैन ने आश्वस्त कराया आपकी जायज मांगों के संबंध में सरकार और उच्च अधिकारियों से बात कर समस्याओं के निराकरण किया जाएगा।