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शेयर बाजार में लगातार खरीद-बिक्री निवेश नहीं कारोबार की श्रेणी में: हाई कोर्ट का फैसला | SHARE HC DECISION

इंदौर। नेत्र सर्जन डॉक्टर राजीव चौधरी हाई कोर्ट (high Court) से अपना केस (dr Rajeev Chaudhary versus tax appellate Tribunal, indore) हार गए हैं। इसी के साथ उनका केस आयकर विभाग (income Tax Department) और शेयर बाजार (share market) में निवेश (invest) करने वालों के लिए एक नजीर (example) बन गया है। शेयर बाजार में शेयर की खरीदी को निवेश कहा जाता है परंतु यदि आप नियमित रूप से शेयरों की खरीदी और बिक्री करते हैं तो यह प्रक्रिया निवेश नहीं बल्कि कारोबार (business) की श्रेणी में आएगी। इसके लिए आपको निर्धारित टैक्स देना होगा। 

शेयर बाजार में निवेश कब कारोबार माना जाता है, इनकम टैक्स लग जाता है

मामला सन 2007-8 का है। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में रहने वाले नेत्र सर्जन राजीव चौधरी ने इस एक वित्तीय वर्ष में 451 बार शेयर बाजार में व्यवहार किया। 288 बार शेयर खरीदे और 163 बार बेचे। डॉ चौधरी के अनुसार उन्होंने शेयर बाजार में निवेश किया और मोटा मुनाफा कमाया लेकिन इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल इंदौर इस प्रक्रिया को निवेश नहीं व्यापार माना। डॉ चौधरी ने इस 1 साल में शेयर बाजार से 1.18 करोड रुपए का मुनाफा कमाया था। आयकर विभाग में इस पर 30% टैक्स लगा दिया। डॉ चौधरी ने इसके खिलाफ अपील की। जनवरी 2019 में ट्रिब्यूनल ने फैसले को सही बताया और डॉक्टर चौधरी को टैक्स अदा करने के लिए कहा। 

हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह मामला आयकर विभाग और शेयर बाजार के लिए नजीर बन गया 

डॉ राजीव चौधरी ने ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने डॉ राजीव चौधरी की याचिका को खारिज कर दिया। इस तरह हाई कोर्ट का डिसीजन एक नजीर बन गया। आयकर विभाग अब देश भर में ऐसे सभी लोगों से टैक्स वसूल सकेगा जो शेयर बाजार में लगातार खरीदी और बिक्री करते हैं।

यदि कोई प्रोफेशनल अपना समय और ज्ञान शेयर बाजार में लगाता है तो वह निवेश नहीं व्यापार है

हाई कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले से ट्रिब्यूनल के अकाउंट मेंबर मनीष बोराड व अन्य द्वारा दिया गया फैसला आयकर विभाग के लिए काफी अहम हो गया है। बोराड ने अपने फैसले में कहा है कि डॉ. चौधरी काफी व्यस्त डॉक्टर हैं, लेकिन रिकॉर्ड बताता है कि उन्होंने अपना समय और ज्ञान नियमित तौर पर शेयर की खरीदी-बिक्री में लगाया। आम निवेशक इस तरह से नहीं करता है, वह निवेश करता है और फिर एक समय तक का इंतजार करता है। आम निवेशक शेयर बाजार के साथ ही पीपीएफ, फिक्स्ड डिपॉजिट आदि जगह पर भी निवेश करता है।

शेयर बाजार में निवेश के मुनाफे पर टैक्स का यह है नियम

1- एक साल से कम अवधि के लिए कोई शेयर रखा और बेचा तो इस पर हुए मुनाफे पर 15% शार्ट टर्म कैपिटल गैन टैक्स लगता है (पहले यह 10% था)

2- यदि एक साल से अधिक अवधि के लिए कोई शेयर रखा और बेचा तो इस पर हुए मुनाफे पर 10 फीसदी लॉंग टर्म कैपिटल गैन टैक्स लगता है (यह एक लाख तक के मुनाफे पर नहीं लगता है और हाल ही में लगना शुरू हुआ है)।