शिक्षकों के लिए दंडात्मक कार्यवाही में अग्रणी शिक्षा विभाग, स्वत्वों के भुगतान में फिसड्डी | Khula Khat
       
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शिक्षकों के लिए दंडात्मक कार्यवाही में अग्रणी शिक्षा विभाग, स्वत्वों के भुगतान में फिसड्डी | Khula Khat

मप्र शिक्षा विभाग में 16 शिक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने पर कुपित शिक्षकों ने आदेश की होली दहन कर विरोध प्रकट किया था। जिसकी त्वरित प्रतिक्रिया में संचालक लोक शिक्षण संचालनालय मप्र भोपाल ने आंदोलन कारी शिक्षक कर्मचारियों के खिलाफ 03 दिसम्बर को अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी कर दिये थे। 

मप्र तृतीय वर्ग शास कर्म संघ के प्रांताध्यक्ष प्रमोद तिवारी व प्रांतीय उपाध्यक्ष कन्हैयालाल लक्षकार ने संयुक्त प्रेस नोट में बताया कि ऐसी तत्परता "शिक्षा विभाग" शिक्षक कर्मचारियों के स्वत्वों के भुगतान में अपनाने में फिसड्डी साबित हो रहा हैं। नवीन शिक्षक संवर्ग को छठे वेतनमान के एरियर की द्वितीय किश्त, सातवें वेतनमान को नियमित करना, शिक्षक संवर्ग व नवीन शिक्षक संवर्ग को पात्रतानुसार वरिष्ठ वेतनमान, द्वितीय व तृतीय क्रमोन्नति वेतनमान में नियमित कर देय एरियर का भुगतान, अध्यापक संवर्ग को हड़ताल अवधी का वेतन शासन व आला अधिकारियों के दिशा-निर्देश के बावजूद जिलों में शत प्रतिशत भुगतान नहीं हो पाया हैं।  

यहाँ विभागीय आला अधिकारियों की चुप्पी दोहरे दृष्टिकोण को उजागर करती हैं । जबलपुर विकास खंड शिक्षा अधिकारी ने दिनांक 06 दिसंबर  को जारी आदेश से कोषालय आपत्ति को लेकर नवीन शिक्षक संवर्ग को सातवें वेतनमान के आधार पर वेतन भुगतान पर रोक के साथ वसूली के भी निर्देश दे दिये हैं । शिक्षा विभाग में षड़यंत्र के तहत शिक्षक कर्मचारियों को प्रताड़ित व परेशान किया जा रहा हैं, वहीं स्वत्वों के भुगतान में जिलों में अनावश्यक विलंब कर भ्रष्टाचार का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा हैं । "मप्र तृतीय वर्ग शास कर्मचारी संघ" प्रमुख सचिव मप्र शासन स्कूल शिक्षा विभाग, आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय मप्र भोपाल से मांग करता है कि शिक्षक कर्मचारियों के स्वत्वों के भुगतान में  समय-सीमा तय कर जवाबदेही सुनिश्चित कर उपेक्षा करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान हो ना चाहिए । प्रदेश में शिक्षकों के मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई में तत्परता व स्वत्वों के भुगतान में लचर कार्यप्रणाली वाला दोहरा रवैया समाप्त किया जाना चाहिए ताकि सौहार्दपूर्ण वातावरण में निश्चिंत होकर प्रदेश में शिक्षक समर्पण भाव से गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा में संलग्न हो सके। 
लेखक कन्हैयालाल लक्षकार मप्र तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष हैं।