Loading...

गुरूजियों ने संविदा शिक्षक के समान वरिष्ठता के लिए प्रदर्शन किया | GURUJI SHIKSHAK PROTEST

अब्दुल वसीम अंसारी/राजगढ़। मध्य प्रदेश में लगभग 1 वर्ष से ज्यादा पूर्ण कर चुकी कमलनाथ सरकार की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है, जंहा सरकार के ऊपर वचनपत्र में किये गए वादों की और ध्यानाकर्षित कराते हुए ज्ञापन और शिकायतो का दौर आज भी बदस्तूर जारी है।

मध्यप्रदेश गुरुजी संविदा अध्यापक संघ के द्वारा राजगढ़ कलेक्टर को मुख्यमंत्री कमलनाथ के नाम ज्ञापन सौंपते हुए कहा गया कि, तत्कालीन सरकार द्वारा 1997-98 हमारी नियुक्ति गुरुजी के पद पर की गई थी, और आज वर्तमान में शिक्षक संवर्ग में 3 वर्ग समाहित है, जिसमे प्रथम क्रमांक में गुरुजी जिनकी नियुक्ति 1997-1998 है, द्वितीय क्रमांक शिक्षाकर्मी जिसकी नियुक्ति 1998 है और तृतीय क्रमांक संविदा शिक्षक जिनकी नियुक्ति 2001 से प्रारंभ है। 

दोनों वर्ग एक शिक्षाकर्मी दूसरा संविदा शिक्षक इन दोनों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता का लाभ मिल रहा है, जबकि शेष वर्ग गुरुजीयों को नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया गया है, जिससे गुरुजीयों को समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि गुरुजी पदोन्नति व क्रमोन्नति के लाभ से वंचित हैं। गुरुजियों का कहना है कि यदि सरकार द्वारा अन्य परेशानियों के साथ स्थानांतरण हेतु कनिष्ठ/वरिष्ठ गणना आदि में नीतिगत निर्धारण नही किया गया तो, सरकार का वचन और गुरिजियों का सरकार पर से भरोसा दोनो टूट जाएंगे और हमारे द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा।

शिवराज सरकार में ली गई थी पात्रता परीक्षा:-

यह भी कहा गया कि पूर्व सरकार द्वारा उपरोक्त तीनो वर्गों में से केवल एक वर्ग गुरुजी की पात्रता परीक्षा ली गई,जो कि न्यायोचित नही है। गुरीजीयो का कहना है कि,पात्रता परीक्षा से किसी भी शसकीय कर्मचारी की पात्रता सिद्ध होती है ,न कि वरिष्ठता, फिर भी गुरुजियों की वरिष्ठता पात्रता परीक्षा से जोड़ी गई थी।

क्या है गुरुजीओ का इतिहास:-

ज्ञापन में गुरुजीयो ने  यह भी बताया कि आज शिक्षा में गुणवत्ता की बात हो रही है, जबकि गुरुजीयो ने उस समय सन 1997-98 में जंगलों, बीहड़ों और पहुँचमार्ग विहीन क्षेत्रो में संचालित ई.जी.एस शालाओं में कठिन परिश्रम कर संसाधनों के अभाव में भी मध्यप्रदेश में शिक्षा के स्तर को बढ़ाया है, जिसकी वजह से तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को यूनिसेफ द्वारा सम्मानित भी किया गया था। गुरुजियों की मेहनत के फलस्वरूप 28 हजार पद स्वीकृत  हुए, जंहा पर द्वितीय शिक्षक के रूप में शासन ने संविदा शिक्षकों की नियुक्ति की। संविदा शिक्षकों को क्रमोन्नति मिल गई लेकिन गुरुजी आज वर्तमान में भी वंचित है।