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आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बीपीएल सर्वे: हाई कोर्ट ने सरकार का आदेश स्थगित किया | anganwadi karyakarta news

जबलपुर। मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (anganbadi karykarta) द्वारा कराए जा रहे बीपीएल सर्वे पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है (high Court stay BPL service job)। सरकार को नोटिस जारी करके पूछा गया है कि जब यह सर्वे का काम आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं (महिला एवं बाल विकास विभाग) का नहीं है तो फिर उनसे क्यों करवाया जाना है। हाईकोर्ट ने कमलनाथ सरकार के इस आदेश के खिलाफ दाखिल हुई याचिका की सुनवाई पूरी होने तक सरकार का आदेश स्थगित कर दिया है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन की प्रांतीय अध्यक्ष विद्या खंगार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं से आईसीडीएस संबंधित काम के साथ 11 अन्य योजनाओं के काम कराए जा रहे हैं। ऊपर से बीपीएल सर्वे का काम भी उन पर बोझ की तरह थोप दिया गया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं पहले ही काम के बोझ से दबी हुई हैं। अभी इन लोगों से दंपति सर्वे, अंत्योदय सर्वे, स्वच्छता दूत, शौचालयों की गिनती, आयोडीन नमक की जांच, गांव में कुओं की गिनती, दवा छिड़काव, जनगणना, चुनाव ड्यूटी, चुनाव नामावली, पशु सर्वे सहित बाकी कई अन्य कार्य कराए जाते हैं। अब इसके साथ बीपीएल सर्वे का काम भी थोप दिया गया था। याचिकाकर्ता ने कहा इन तमाम अतिरिक्त कार्यों की वजह से उनका मूल काम प्रभावित हो रहा है। कुपोषण ख़त्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार गंभीर हैं लेकिन आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को दीगर काम में लगा दिया गया है।

हाई कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा, आदेश पर रोक लगाई

याचिकाकर्ता के तथ्यों को सुनने के बाद जस्टिस सुबोध अंबेडकर की एकल पीठ ने राज्य सरकार, सचिव और आयुक्त महिला बाल विकास विभाग सहित जबलपुर कलेक्टर को नोटिस जारी किया। सभी से जवाब मांगा गया है एवं इस याचिका पर फैसला होने तक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं से बीपीएल सर्वे के काम कराने पर रोक लगा दी।