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TWTA ने शिक्षकों के 7वें वेतनमान के लिए मंत्री को ज्ञापन सौंपा

मंडला। ट्राईबल वेलफेयर टीचर्स एसोसिएशन मध्य प्रदेश के प्रांत अध्यक्ष डीके सिंगौर के नेतृत्व में सातवें वेतनमान को लेकर आदिम जाति कल्याण मंत्री ओमकार सिंह मरकाम के निवास स्थान डिंडोरी में एक ज्ञापन सौंपकर चर्चा की गई। 

मंत्री ओमकार मरकाम ने मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए तत्काल प्रमुख सचिव आदिवासी विकास दीपाली रस्तोगी से टेलीफोन पर चर्चा निर्देश दिया। मंत्री मरकाम ने स्पष्ट कहा कि शिक्षकों के सातवें वेतनमान को लेकर किसी भी तरह का विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संघ ने सातवें वेतनमान की समस्या के अतिरिक्त अनुकंपा नियुक्ति और ऐसे शिक्षक जो किसी भी कारण से जिन्हें नियुक्ति आदेश नहीं मिला है उन्हें तत्काल नियुक्ति आदेश प्रदान करने की बात कही। इस पर भी मंत्री ने अपनी सहमति दी और जल्द से जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए। आदिम जाति कल्याण मंत्री की भावनाओं के अनुरूप संघ ने शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दर्शाइ। 

प्रांत अध्यक्ष डी के सिंगौर के  नेतृत्व में मध्य प्रदेश के अनेक जिलों से आए हुए शिक्षकों ने भी शालाओं को गोद लेने और गुणवत्ता के लिए काम करने का संकल्प लिया। शिक्षा के क्षेत्र में एसोसिएशन  द्वारा किए जा रहे प्रयास कि मंत्री ने भूरी भूरी प्रशंसा की और अपेक्षा की कि शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे समाज की बेहतरी के लिए एसोसिएशन द्वारा आने वाले समय में भी जो योगदान दिया जाएगा वह ऐतिहासिक होगा।

इस अवसर पर उपस्थित शिक्षक साथियों ने मंत्री जी को पेन और कॉपी भेंट देकर उनका स्वागत किया। मंडला जिले से प्रांत अध्यक्ष श्री डीके सिंगौर के नेतृत्व में रविंद्र चौरसिया, सुनील नामदेव आशीष लोध चंद्रशेखर तिवारी प्रदीप पटेल विजय उपाध्याय कमलेश गुप्ता बी एल साहू सनत तिवारी जीवन मरावी व्यास नारायण दुबे शिव शंकर पांडे संतोष पुरी गोस्वामी श्याम बैरागी दिलीप मरावी नन्द किशोर कटारे प्रकाश सिंगौर संजीव दुबे  सहित सैकड़ों शिक्षक उपस्थित रहे


गुरुजियों ने भी दिया ज्ञापन
मध्य प्रदेश गुरुजी प्राथमिक शिक्षक संघ जिला शाखा मंडला के अध्यक्ष श्याम बैरागी द्वारा भी नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता को लेकर आदिम जाति कल्याण मंत्री ओमकार सिंह मरकाम ज्ञापन सौंपा गया एवं चर्चा की गई। ज्ञापन में कहा गया कि सन 1997 98 से शिक्षा के लोक व्यापी करण की दिशा में शिक्षा गारंटी में कार्यरत गुरुजी ने अपनी अहम भूमिका निभाई। गुरुजी शुरू से ही अपनी नियमितीकरण के लिए समय-समय पर अपनी मांगों को बुलंद करते रहे लेकिन सरकारों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। 2008 में गुरुजियों की गुरुजी पात्रता परीक्षा ली गई और उन्हें संविदा शिक्षक बनाए गए। 2011 में उन्हें सहायक अध्यापक के पद पर संविलियन किया गया। उनकी सेवा की गणना 1997 -98 से नहीं की जा रही है जिससे वे अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। सरकार की वित्तीय माली हालत को देखते हुए गुरु जी चाह रहे हैं कि उन्हें नियुक्ति दिनांक से केवल पेपर सीनियरिटी मिल जाए जिससे उनका स्वाभिमान बना रहे। अपनी अनार्थिक मांगों को लेकर गुरुजी ने ज्ञापन सौंपा है।